दुर्ग ग्रामीण अंचल में सरसों की लहलहाती फसल, किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान



संजय साहू /अंडा।  दुर्ग जिले के ग्रामीण अंचल में इस समय सरसों की खेती अपने पूरे शबाब पर है। खेतों में दूर-दूर तक फैली पीले रंग की सरसों की फसल न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ा रही है, बल्कि किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।
इस वर्ष अनुकूल मौसम, समय पर बुवाई और पर्याप्त सिंचाई के कारण सरसों की फसल अच्छी स्थिति में है। गांव-गांव में किसान पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। सरसों की फसल कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में गिनी जाती है, जिससे छोटे और मध्यम किसान भी इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्रामीण किसानों का कहना है कि इस बार की फसल में कीट प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना है। साथ ही सरसों के तेल की बाजार में बढ़ती मांग से किसानों को उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होती है और रबी सीजन की महत्वपूर्ण नकदी फसल है। दुर्ग ग्रामीण अंचल में सरसों की बढ़ती खेती से क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
पीले फूलों से सजे खेत न सिर्फ किसानों की मेहनत की कहानी बयां कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अंचल की प्राकृतिक सुंदरता को भी दर्शा रहे हैं।