नगरी/सिहावा, बेलरगांव।सिहावा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और उनके अभिभावकों के संघर्ष, विश्वास और लोकतांत्रिक आवाज की जीत है। यह उन लाखों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को मजबूती से उठाया।
विधायक श्रीमती मरकाम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही ने देश के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया। लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, उनके माता-पिता के सपनों और आर्थिक संसाधनों के साथ लगातार अन्याय हुआ। इसके बावजूद केंद्र सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही, जिसके कारण युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हुआ।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता। जब देश का युवा अपने भविष्य और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करता है, तब सत्ता को भी जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी जनदबाव और लोकतांत्रिक चेतना का परिणाम है।
अंबिका मरकाम ने कहा कि केवल इस्तीफा देने से छात्रों के साथ हुआ अन्याय समाप्त नहीं हो जाएगा। केंद्र सरकार को शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार करना होगा, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि—
राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूर्णतः पारदर्शी, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।
पेपर लीक और परीक्षा घोटालों में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध एवं कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए तथा परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए।
भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं की निगरानी के लिए स्वतंत्र और सक्षम तंत्र विकसित किया जाए, जिससे युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित हो।
विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने कहा कि देश का युवा किसी पर उपकार नहीं, बल्कि अपने परिश्रम का न्याय चाहता है। ईमानदारी से मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करना केंद्र सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और अब समय आ गया है कि सरकार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई कर देश के युवाओं का विश्वास पुनः अर्जित करे।







