सीबीआई अफसर बन अधिवक्ता से 41 लाख की ठगी में शामिल आरोपी को 10 साल कैद ,बघेरा की महिला अधिवक्ता को वीडियो कॉल पर 15 दिन रखा था नजरबंद


दुर्ग।  महिला अधिवक्ता को डिजिटल अरेस्ट करके 41 लाख रुपए की ठगी करने वाले साइबर ठग को अदालत ने दोषी करार दिया है। आरोपी मनीष दोसी ने सीबीआई अफसर बनकर अधिवक्ता को वीडियो कॉल किया।

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उसके खाते में 8 करोड़ रुपए से ज्यादा की संदिग्ध राशि आने की बात कहते हुए गिरफ्तारी का डर दिखाकर कॉल पर नजरबंद कर लिया। प्रकरण में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शेख अशरफ की कोर्ट ने आरोपी मनीष को 10 वर्ष कठोर कारावास और 2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी बघेरा निवासी फरिहा अमीन ने बीते 5 फरवरी को दुर्ग कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रार्थिया ने पुलिस को बताया कि मुझे 21 जनवरी 2025 की सुबह करीब 10.35 बजे एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल उठाने पर सामने वाले ने कहा कि दिल्ली पुलिस मेरे खिलाफ मनी लॉड्रिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग और आइडेंटिटी थेफ्ट केस की जांच कर रही है। उसने बताया कि सीबीआई ने एक आरोपी से 108 बैंक खाते जब्त किए हैं, जिसमें से 8.07 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन मेरे बैंक खाते में हुआ है। आरोपियों ने अधिवक्ता फरिहा को गिरफ्तारी का डर दिखाकर 22 जनवरी से 4 फरवरी के बीच अलग-अलग किस्तों में आरटीजीएस के माध्यम से कुल 41 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। उसके बाद भी पैसों की मांग कम नहीं हुई। इस पर उसने पुलिस में केस दर्ज करा दिया। कोतवाली पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर कॉल डिटेल और बैंक अकाउंट के आधार पर मोरबी, गुजरात निवासी मनीष दोसी और सुरेंद्रनगर, गुजरात निवासी असरफ खान को गिरफ्तार कर लिया। मामले के ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी असरफ पर दोष सिद्ध करने में असफल रहा, जबकि कोर्ट ने धारा 317(3), 6 (2) में दोर्ष करार दिया।