औषधीय खेती की नई क्रांति, ‘वच’ की खेती से किसानों को मिलेगा चार गुना तक अधिक लाभ….एक एकड़ में 20 हजार की लागत पर 1 लाख रुपये तक की शुद्ध आय संभव

नगरी/सिहावा,बेलरगांव।छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा धमतरी जिले के ग्राम राउतमुड़ा में ‘सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण’ का आयोजन किया गया, जिसमें धमतरी और नारायणपुर के लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसे वैकल्पिक मॉडल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे कम लागत में अधिक आय अर्जित की जा सके। औषधीय पौधों की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ वन आधारित अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बन रही है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और भूमि औषधीय पौधों की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। राज्य सरकार किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। आने वाले समय में औषधीय खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी।

कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप किसानों को लाभकारी खेती से जोड़ने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से औषधीय पौधों की खेती अपनाकर शासन की योजनाओं का लाभ लेने का आह्वान किया।

विकास मरकाम ने पैडी डायवर्सन मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि ‘वच’ की खेती धान का लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में इसकी खेती पर लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि एक वर्ष में किसान लगभग एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर सकते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को खेत में ही वच की जड़ों की खुदाई, सफाई, कटाई, सुखाने और विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से विदोहन और प्रसंस्करण करने पर किसानों को बेहतर गुणवत्ता और अधिक मूल्य प्राप्त होता है।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी बन रही आय का नया स्रोत

प्रशिक्षण के बाद बोर्ड के पदाधिकारियों ने ग्राम पोतियाडीह का दौरा कर माँ गायत्री स्व-सहायता समूह द्वारा दो एकड़ में की जा रही ‘खस’ की खेती का निरीक्षण किया। समूह की महिलाओं ने बताया कि आगामी सप्ताह में होने वाली हार्वेस्टिंग से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होने की उम्मीद है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण स्वावलंबन का प्रभावी माध्यम बन रही है। राज्य सरकार महिलाओं और किसानों को आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसे नवाचारों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

कार्यक्रम में बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, सलाहकार (औषधि पौधा खेती) डी.के.एस. चौहान, विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।