पाटन में राशन घोटाले की बू: अकतई की दुकान में अव्यवस्था चरम पर, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अधिकारी जांच में आये तब स्टाक में था चांवल, दो दिन बाद दुकान से चांवल गायब, आखिर कहा गया गरीबी का चांवल, जांच का विषय


पाटन।
पाटन क्षेत्र के अकतई स्थित शासकीय उचित मूल्य राशन दुकान की बदहाल व्यवस्था अब खुली लापरवाही और कथित गड़बड़ी की कहानी बयां कर रही है। हालात ऐसे हैं कि हितग्राहियों को पहले से ही चावल नहीं मिल रहा था, अब शक्कर और नमक का वितरण भी बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सीधा-सीधा गरीबों के हक पर डाका है।
कुछ दिन पहले समाचार प्रकाशित होने के बाद एसडीएम पाटन ने फूड इंस्पेक्टर को जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो दुकान में चावल का स्टॉक दिखाया गया। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी के लौटते ही दो दिन बाद सेल्समैन पिकअप वाहन से दुकान में रखा चावल कहीं और ले गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला हितग्राहियों के चावल के गबन का बनता है। सवाल उठ रहा है कि जब जांच में स्टॉक मौजूद था तो आखिर वह चावल गया कहां?
सरपंच की सूचना भी बेअसर
ग्राम सरपंच द्वारा पिछले तीन दिनों से फूड इंस्पेक्टर को पूरे मामले की जानकारी दी जा रही है, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही वितरण व्यवस्था सुधरी। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
तीन किलोमीटर दूर से आकर खाली हाथ लौट रहे ग्रामीण
अकतई के अलावा रीवा गहन और चारभाठा के ग्रामीण भी चावल, नमक और शक्कर के लिए परेशान हैं। तीन किलोमीटर दूर से राशन लेने आने वाले ग्रामीण दुकान बंद मिलने पर मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने रोजमर्रा के भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
गुरुवार को एसडीएम से करेंगे शिकायत
ग्रामीणों ने तय किया है कि गुरुवार, 19 फरवरी को वे एसडीएम से मुलाकात कर फूड इंस्पेक्टर और सेल्समैन की औपचारिक शिकायत करेंगे। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए भी बाध्य होंगे।
फूड इंस्पेक्टर पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जब से फूड इंस्पेक्टर राम नारायण साहू ने पाटन क्षेत्र का प्रभार संभाला है, तब से राशन दुकानों की व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई है। लोगों का यह भी कहना है कि एसडीएम पाटन भी फूड इंस्पेक्टर के सामने बेबस नजर आ रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन गरीबों के हक की रक्षा करेगा या फिर राशन की यह बंदरबांट यूं ही चलती रहेगी?