शैलदेवी महाविद्यालय में मासिक धर्म पर दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

संजय साहू

अंडा। शैलदेवी महाविद्यालय, अंडा दुर्ग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में योग एवं दर्शन विभाग द्वारा मासिक धर्म पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि राजन दुबे, अध्यक्ष, शैलदेवी महाविद्यालय एवं मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमती दुर्गा साहू, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मठपुरैना, रायपुर थी। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए डॉ. रजनी राय ,विभागाध्यक्ष, शिक्षा ने इस स्त्री विशेषण को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक वरदान है जिससे सभी स्त्रियां किशोरावस्था के आरंभ में परिचित होती है परंतु शारीरिक मानसिक अपरिपक्वता या लज्जावस बता नहीं पाती और कई रोगों का शिकार हो जाते हैं अतएव इस संदर्भ में उचित जानकारी होना आवश्यक है।

मुख्य वक्ता श्रीमती दुर्गा साहू ने कहा कि मासिक चक्र हर महिला के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उसके शारीरिक स्वास्थ्य, पुनर्जनन क्षमता और आत्म-समझ में महत्वपूर्ण है। आमतौर पर, मासिक चक्र 28 दिन का होता है। हालांकि, कुछ महिलाओं में यह 21 से 35 दिनों तक हो सकता है यह महिला के शारीरिक स्वास्थ्य और उसकी जीवनशैली पर निर्भर करता है।योग एवं दर्शन के माध्यम से हम सभी प्रकार के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक रोगों का त्वरित निदान पा सकते हैं क्योंकि योग विज्ञान ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक वरदान है जिसे हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने जाना परखा और समझा और इस पर अनेक ग्रंथ लिखकर हमें बताया कि अनेक रोगों का उपचार समयानुसार कैसे करना चाहिए। स्पष्ट है कि हम योग और दर्शन के माध्यम से मासिक चक्र को नियंत्रित कर सकते हैं और उत्पन्न होने वाले स्त्री रोगों से बच सकते हैं। मासिक धर्म में यौगिक क्रियाओं का विशेष महत्व है। योग अनेक प्रकार से इसमें सहायता प्रदान कर सकता है और इससे मासिक चक्र में होने वाले असंतुलन को दूर किया जा सकता है। उन्होंने महाविद्यालय की छात्राओं को मासिक धर्म में होने वाली समस्याओं के विषय से अवगत कराते हुए विभिन्न योगासनों की जानकारी दी जिससे वे जीवन में अपने मासिक चक्र को नियमित व स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते है।मासिक चक्र के समय योग करने से आप इस दौरान होने वाली कई समस्याओं को कम कर सकती हैं। इस समय महिलाएं प्राणायाम, भुजंगासन, मत्सयासन और मार्जरी आसन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकती हैं। इससे हार्मोन बैलेंस में रहते हैं और पीठ व अन्य दर्द में राहत मिलती है। परंतु किसी भी योगासन को करने से पूर्व विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। श्री हिमांशु केशरवानी विभागाध्यक्ष, योग एवं दर्शन विभाग ने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आप जीवनशैली में योग को अवश्य शामिल करें क्योंकि योग शरीर के सभी अंगों के सहज संचालन के लिए उपयोगी होता है। इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा कम होता है। रोजाना योग करने से आप मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर ढंग से कर सकते हैं। योग से शरीर में प्राण वायु का स्तर बढ़ता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने भविष्य में ऐसे ही सामाजिक सरोकार से संबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाने हेतु प्रेरित करते हुए सबकी सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।