सेलुद।सड़कों पर डेरा जमाने वाले आवारा और घुमंतु पशुओं के कारण आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सेलुद के युवाओं ने एक बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक कदम उठाया है।सेलूद के गांधी चौक में कुछ दिन पूर्व एक मवेशी का दुर्घटना से सिर अलग हो गया जिसके बाद रूपेश साहू (इशु) के नेतृत्व में युवाओं की टोली ने आसपास के ग्रामीण अंचलों में जाकर एक विशेष अभियान चलाया, जिसके तहत सड़कों पर बैठने वाले लगभग 150 घुमंतु पशुओं के गले में रेडियम पट्टी (रिफ्लेक्टिव कॉलर) बांधी गई।इस मानवीय पहल से न केवल बेजुबान मवेशियों की जान सुरक्षित हुई है, बल्कि रात के समय सफर करने वाले राहगीर भी बड़ी दुर्घटनाओं का शिकार होने से बच सकेंगे।

युवाओं द्वारा यह सुरक्षा अभियान सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तहत आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों को कवर किया गया। रूपेश साहू (इशु) और उनकी टीम ने गोंडपेंड्री, छाटा, फुंडा, देवादा, सांतरा, मर्रा, जामगांव, गाडाडीह, फेकारी, पौहा और कुम्हली जैसे विभिन्न गांवों की सड़कों का दौरा किया। इन गांवों में घूम रहे मवेशियों को चिन्हित कर उनके गले में रेडियम रिफ्लेक्टिव पट्टियां बांधी गईं। रूपेश साहू (इशु) एवं सेलुद के युवा साथी द्वारा ये पहल का उद्देश्य रात के समय सड़कों पर बैठे मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाना साथ ही दुर्घटना में मवेशियों को जान गंवाने से बचाना है।वाहन की हेडलाइट पड़ते ही ये पट्टियां दूर से ही चमकने लगती हैं, जिससे चालकों को अंधेरे में भी मवेशियों की मौजूदगी का स्पष्ट आभास हो जाता है।
ग्रामीण मार्गों और मुख्य सड़कों पर मवेशियों का झुंड बनाकर बैठना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। विशेषकर रात्रि के समय, जब वाहन तेज गति में होते हैं, तो सड़क पर बैठे काले या गहरे रंग के मवेशी वाहन चालकों को समय पर दिखाई नहीं देते। इसके चलते कई बार भीषण सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें वाहन चालकों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं को भी अपनी जान गंवानी पड़ती है या वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।रूपेश साहू और सेलुद के युवाओं की इस दूरदर्शी सोच ने इस समस्या का एक बेहद व्यावहारिक और प्रभावी समाधान पेश किया है। स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और वाहन चालकों ने युवाओं की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और अन्य युवाओं से भी इस तरह के सामाजिक कार्यों से जुड़ने की अपील की है।यह प्रयास समाज में युवाओं की बढ़ती संवेदनशीलता और पशुओं के प्रति उनके प्रेम का एक बेहतरीन उदाहरण है।








