पंडरिया-नगर के जोरा मंदिर के जीर्णोद्धार पश्चात शनिवार से वेदी निर्माण, अखंड रामायण पाठ व पूजा कार्य प्रारंभ हो गया। रविवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें नगर के 307 बच्चों व महिलाएं कलश लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए।
शोभायात्रा का आयोजन
शोभायात्रा दोपहर 12 बजे जोरा मंदिर से महामाया मंदिर तक निकाला गया। शोभायात्रा के दौरान नगर भगवामय दिखाई पड़ रहा था।
आज के कार्यक्रम
आज सोमवार को वेदि पूजन, देव स्थापना, नेत्र मिलन आदि, अभिषेक, पूजन, श्रृंगार, चोला आदि, शिखर कलश स्थापना, हवन, विशेष आरती, महाप्रसाद, ब्राह्मणभोज, विशाल भंडारा, प्रसादी वितरण का कार्यक्रम संपन्न होगा।
जनसहयोग से हुआ पुनर्निर्माण
मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए मोहल्ले सहित नगर वासियों की बैठक की गई। जिसमें जर्जर मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य जनसहयोग से करने का निर्णय लिया गया था। जीर्णोद्धार के लिए राम मंदिर के तर्ज पर नगर व क्षेत्र सहित सभी लोगों से सहयोग लेकर किया गया।
400 वर्ष पुराना है जोरा मंदिर
जोरा मंदिर 400 वर्ष पुराना है। जोरा मंदिर नगर के पुराने बस स्टैंड के पास जोरा तालाब की किनारे स्थित है। जोरा मंदिर में मुख्य मंदिर में राम दरबार की प्रतिमा स्थापित है। राम, जानकी व लक्षमण की प्रतिमा अति प्राचीन अष्टधातु से निर्मित है।
मंदिर का इतिहास
मंदिर का जीर्णोद्धार 100 वर्ष पहले रानी मानकुमारी द्वारा पदत्त जमीन पर राजा पद्मराज सिंह के देख-रेख में नागा पुजारियों द्वारा जनसहयोग से कराया गया था। राम मंदिर आज भी मजबूत है, लेकिन परिसर में राम मंदिर के सामने स्थित शिव मंदिर व हनुमान मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गया था। छतों से प्लास्टर गिर रहे थे, और दीवार के ईंटे दरकने लगे थे।
जीर्णोद्धार कार्य
जीर्णोद्धार कार्य जनसहयोग से किया गया। पंडरिया के पूर्व राजा स्व. कृष्ण राज सिंह के सुपुत्र स्व. सुनील राज के भाई अमरराज की सहमति से पंडरिया नगर के धर्म प्रेमी नागरिकों की समिति बनाकर जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण किया गया। समिति में प्रमुख रूप से धर्मजीत सिंह विधायक तखतपुर के विशेष प्रयास से नगर के धर्म प्रेमियों द्वारा समिति बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्ण कराया गया।







