पाटन।
पाटन ब्लॉक के ग्राम तरीघाट में रहने वाले नेत्रहीन ईश्वर प्रसाद की पीड़ा प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक मार्मिक तस्वीर पेश कर रही है। बचपन से दृष्टिहीन ईश्वर प्रसाद, पिता पुनीत राम, पिछले तीन वर्षों से अपने ही हक के राशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
ईश्वर प्रसाद का राशन कार्ड बना हुआ है और शुरुआत में उन्हें शासकीय उचित मूल्य की दुकान से नियमित रूप से चावल मिलता था। लेकिन तकनीकी खामियों ने उनकी जिंदगी को संकट में डाल दिया है। दरअसल, पॉश मशीन में उनका फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उनका केवाईसी नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से उन्हें राशन का आवंटन नहीं मिल रहा।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि नेत्रहीन होने के कारण उनका आंखों का स्कैन भी संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वे किसी भी तरह से सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
ईश्वर प्रसाद ने एसडीएम कार्यालय और जनपद कार्यालय के कई चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। प्रशासन की इस उदासीनता के चलते अब उनके सामने भूखे रहने या भीख मांगकर जीवनयापन करने जैसी विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की परेशानी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या शासन-प्रशासन के पास दिव्यांगजनों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है? जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तुरंत समाधान निकाला जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद को अपने हक के लिए यूं भटकना न पड़े।







