केशव साहू

डोंगरगढ़,। तहसील डोंगरगढ़ अंतर्गत ग्राम मेढ़ा धान खरीदी केंद्र में वर्ष 2025-26 की धान खरीदी प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डोंगरगढ़ को सौंपे गए शिकायत पत्र में लगभग 904 क्विंटल धान की कमी दर्शाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में मेढ़ा धान खरीदी केंद्र में कुल 96,258 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार धान का उठाव 99.06 प्रतिशत दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लगभग 904 क्विंटल धान कम पाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 28 लाख 2 हजार 400 रुपये बैठती है।
धान खरीदी प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि धान खरीदी के दौरान किसानों से प्रति कट्टा 40 किलोग्राम धान खरीदा गया, वहीं अतिरिक्त धान भी प्राप्त हुआ था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस आधार पर खरीदी केंद्र के पास अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन अभिलेखों में कमी दिखाई देना संदेह पैदा करता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि खरीदी अवधि के दौरान किसी प्राकृतिक आपदा, आगजनी, बारिश या अन्य कारणों से धान को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना दर्ज नहीं है। साथ ही धान खरीदी एवं उठाव की प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई थी।
शासन की भंडारण व्यवस्था के बावजूद कमी
शिकायतकर्ता ने कहा है कि धान के सुरक्षित भंडारण के लिए शासन द्वारा तिरपाल, भंडारण सामग्री तथा अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए अलग से राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में बड़ी मात्रा में धान की कमी होना गंभीर विषय है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग
शिकायत में मेढ़ा धान खरीदी केंद्र से जुड़े कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि धान की कथित कमी और संभावित वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूर्व के मामलों का भी किया गया उल्लेख
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी समिति में धान गबन एवं अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। इसी आधार पर वर्तमान मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
खाद वितरण और नियुक्तियों को लेकर भी आरोप
धान कमी के मामले के अलावा शिकायत में खाद वितरण, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा कुछ नियुक्तियों को लेकर भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच कराए जाने की मांग की है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल शिकायत पत्र संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजस्व एवं संबंधित विभाग इस मामले की जांच किस प्रकार करते हैं और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।
स्थानीय किसानों में चर्चा का विषय
ग्राम मेढ़ा और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि धान खरीदी में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसानों का विश्वास बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






