गर्मी के धान का रकबा बढ़ा,भूजल स्तर नीचे घट रहा…पेयजल के लिए होगा संकट

पंडरिया।ब्लाक के मैदानी क्षेत्रों में लगातार गर्मी के धान का रकबा बढ़ते जा रहा है।जिसके सिचाई के लिए ट्यूबवेल के माध्यम से भूजल का उपयोग किया जा रहा है।इसका दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका दिखाई पड़ रही है।क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों गर्मी के धान की फसल लगाई जा रही है।फसल लगाने का कार्य अभी जारी है।गर्मी के धान की फसल ग्राम डोमसरा,रेंगबोड,कुंडा,माकरी,खम्हरिया,अखरा,सेंहाभाठा,ओड़ाडबरी सहित रुसे,मोहगांव के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक लगाई गई है।इसके अलावा अब वनांचल में भी धान की फसल लगाई जा रही है।


वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी तरुण दुबे ने बताया कि कुंडा के आस-पास गर्मी के धान की फसल अधिक लगाई जाती है।पिछले वर्ष 159 हेक्टेयर में धान की फसल लगी थी।वर्तमान में डोमसरा,रेंगाबोड, खम्हरिया,कुंडा,सहित कई गांव ऐसे हैं जहां अधिकतर किसान धान का फसल लगाए हैं। कृषि विकास अधिकारी तरुण दुबे ने बताया कि अभी तक ब्लाक में कुल 392 हेक्टेयर पर धान की फसल लग चुकी है।जिसमें कुंडा क्षेत्र में 180 हेक्टेयर,पंडरिया क्षेत्र में 170 हेक्टेयर, कुकदूर क्षेत्र में 5 हेक्टेयर,कोदवागोड़ान क्षेत्र में 12 हेक्टेयर तथा पांडातराई क्षेत्र में 25 हेक्टेयर शामिल है।वहीं अभी धान की फसल अभी लगाई जा रही है।जिससे रकबा बढ़ेगा।उन्होंने बताया कि
किसानों को गर्मी में धान की फसल नहीं लेने की सलाह दी जा रही है।तिल, मक्का,मूंग की फसल लगाने को कहा जा रहा है।जिससे पानी की बचत होगी तथा फसल परिवर्तन से जमीन का मृदा का उपजाऊपन भी बढ़ेगा।धान की फसल लेने से अधिक पानी की खपत होती है।एक एकड़ धान उत्पादन में जितना पानी लगता है,उतने पानी में तिलहन या दलहन की पांच एकड़ से अधिक खेती की जा सकती है।


जल संकट बढ़ेगा-क्षेत्र में सिचाई के लिए कोई बड़ी परियोजना नहीं है।किसान सिचाई के लिए भूजल का उपयोग ट्यूबवेल के माध्यम से किया जाता है। क्षेत्र में जितनी मात्रा में भूजल का दोहन किया जा रहा है।उतनी मात्रा में जल संग्रहण नहीं हो पा रहा है।प्रतिवर्ष भूजल स्तर नीचे होते जा रहा है।लोगों को जलसंग्रह व दोहन पर संतुलन बनाकर उपभोग करने की जरूरत है।जो आने वाले समय मे भूजल संकट के लिए सचेत कर रहा है।वर्तमान में क्षेत्र में भूजल स्तर 100 फिट से अधिक नीचे जा चुका है,इस वर्ष भूजल का दोहन बढ़ने से भूजल स्तर और नीचे चला जायेगा।पीएचई के एसडीओ राम ने बताया कि महली व डबरी क्षेत्र में हैंडपंप ड्राई हो गए हैं,बाकी जगह हेण्डपम्प चालू हैं।भूजल के अधिक दोहन से निश्चित ही भूजल स्तर नीचे जाएगा।लोगों को संग्रहण व उपभोग मेम संतुलन बनाकर भूजल का उपयोग करना चाहिए।


क्यों बढ़ रहा धान का रकबा-इस वर्ष धान का रकबा तेजी से बढ़ रहा है,इस पर जानकारों का कहना है कि धान का समर्थन मूल्य बढ़ने के कारण धान का रकबा बढ़ रहा है।वहीं शासन द्वारा 21एकड़ प्रति एकड़ खरीदी करने के कारण भी लोग धान की फसल लगा रहे हैं।वहीं किसान खरीफ के फसल को बेच देते हैं।जिससे गर्मी का फसल घरेलू उपयोग के काम आ सकता है।