पाटन। इस वर्ष हुई मूसलाधार बारिश के बाद खारून नदी सहित क्षेत्र के नदी-नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया था। नदी किनारे बसे गांवों में जलभराव की स्थिति से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन अब बारिश का मौसम समाप्त होते ही पाटन क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली खारून नदी का जलस्तर घटकर सामान्य स्थिति में लौटने लगा है। नदी में पानी कम होते ही रेत के अवैध उत्खनन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नदी किनारे के विभिन्न इलाकों में रेत निकासी और परिवहन की गतिविधियां तेज होने की बात सामने आ रही है।

जलस्तर घटा तो नदी में फिर शुरू हुई रेत की उठापटक

खारून नदी क्षेत्र के लिए केवल जलस्रोत ही नहीं, बल्कि ग्रामीण जनजीवन और पर्यावरण का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसके बावजूद नदी का जलस्तर कम होते ही रेत निकालने की गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर नदी किनारे के कई स्थानों से ट्रैक्टर-ट्रॉली और हाइवा के माध्यम से रेत परिवहन किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेत का उत्खनन निर्धारित नियमों और अनुमति के दायरे में हो रहा है या फिर इसकी आड़ में अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है?

प्राकृतिक संपदा पर चोट, पर्यावरण को भी खतरा
नदी से नियमों के विपरीत रेत का उत्खनन केवल खनिज संपदा के नुकसान तक सीमित नहीं है। अनियंत्रित खुदाई से नदी की प्राकृतिक संरचना, तटों की स्थिरता और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि समय रहते निगरानी नहीं की गई, तो नदी क्षेत्र में अनियंत्रित उत्खनन भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
आखिर किसकी निगरानी में हो रहा रेत का परिवहन?
रेत निकासी की गतिविधियों के बीच खनिज विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमले की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि कहीं बिना अनुमति या निर्धारित नियमों के विपरीत उत्खनन हो रहा है, तो उसकी पहचान कर कार्रवाई करना विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि नदी किनारे रेत उत्खनन के लिए किन स्थानों पर वैध अनुमति दी गई है, कितने वाहनों को परिवहन की अनुमति है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
खारून नदी में रेत उत्खनन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सबकी नजरें टिकी हैं। जरूरत है कि नदी किनारे के संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाए, रेत परिवहन में लगे वाहनों के दस्तावेजों की जांच हो और अवैध उत्खनन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि खारून नदी की प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए प्रशासन समय रहते कदम उठाएगा या नदी का जलस्तर घटने के साथ ही अवैध उत्खनन की शिकायतें भी बढ़ती रहेंगी?






