विधानसभा शीतकालीन सत्र :तीन बड़े कानून से हटाई कैद की सजा 11 विभागों के 116 प्रावधान बदले

विधानसभा : विपक्ष की गैर  मौजूदगी में छत्तीसगढ़ जन विश्वास, निजी विश्वविद्यालय ,दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक पारित

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन विपक्ष की गैर मौजूदगी में सत्ताधारी दल की ओर पेश तीन संशोधन विधेयक पारित किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ जन् विश्वास  विधेयक का दूसरा भाग ,छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन तथा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक शामिलहै। जन् विश्वास  विधेयक और दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक के प्रावधानों के बारे में जैसा बताया था वैसे ही सदन में पारित किया गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा पेश किए गए जनविश्वास  विधेयक के तहत 11 विभागों के 14 अधिनियम की 36 धाराओं के 116 प्रावधानों को बदला गया है। इसमें राज्य में व्यापार श्रम और सिंचाई प्रबंधन से जुड़े कई कानून को सरल बनाया गया । इसके तहत अधिनियमों में ऐसे प्रावधानों को बदल गया जिनमें मामूली गलतियों पर आपराधिक मुकदमे और जेल की सजा का प्रावधान था अब उन्हें जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाएगा।

36 धाराओं में किया गया बदलाव जल संसाधन के सबसे अधिक 30

राज्य सरकार द्वारा जिन 11 विभागों के 36 धाराओं के 116 प्रावधान बदले जाएंगे उनमें वाणिज्य ,कर जीएसटी ,संस्कृति धार्मिक न्याय एवं धर्मस्य मछली पालन श्रम पंचायत आवास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, स्कूल शिक्षा, पीडब्लूडी ,राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग शामिलहै। सबसे अधिक जल संसाधन विभाग की छह धाराओं के एक 30 प्रावधान बदले जाएंगे जबकि श्रम के 27 पंचायत के 13 और वाणिज्य जीएसटी के 16 प्रावधान बदले जाएंगे

निजी विश्वविद्यालय संशोधन कोलंबिया 21वीं यूनिवर्सिटी

सदन में उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पेश किया कोलंबिया प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के लिए यह विधेयक लाया गया यह प्रदेश का 21वां निजी विश्वविद्यालय होगा। भाजपा विधायक अजय चंद्रकार ने कहा कि प्रदेश में कई निजी विश्वविद्यालय खुल चुके हैं कई संस्थानों पर  सीट खाली रहती है ऐसे में प्रदेश में अब विवि की संख्या बढ़ाने की बजाय पढ़ाई की क्वालिटी पर फोकस करना चाहिए ।

दुकान एवं स्थापना संशोधन गुमास्ता के लिए 20 कर्मचारी जरूरी महिलाओं को भी नाइट ड्यूटी

विधानसभा में श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन विधानसभा में छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक पेश किया इसमें गुमास्ता के लिए अब 10 की जगह 20 कर्मचारियों का होना अनिवार्य कर दिया गया है ।इसके साथ ही महिला कर्मियों के लिए भी नाइट ड्यूटी का नियम लाया गया है लेकिन इसमें महिला कर्मी की सहमति होना जरूरी है दो दिन पहले यह बता दिया था की दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक में क्या-क्या प्रावधान होने वाले हैं। संशोधन विधेयक में जिन बिंदुओं में बदलाव किया गया है उनमें दैनिक काम की अवधि  नौ की जगह 10 घंटे कर दिया गया है ।वही काम का  शेड्यूल लचीला बनाने के लिए ओवर टाइम को भी 10:30 घंटे से बढ़कर 12 घंटे किया गया ।इसके अलावा मौसमी एवं आकस्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तिमाही ओवर टाइम की सीमा 125 घंटे से पढ़कर 144 घंटे कर दी गई है राज्य के श्रमिकों के लिए कार्यकारी वातावरण बनाने के लिए और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए यह बदलाव किया गया है।

5 घंटे में 33.33 घंटे चर्चा : रमन

5 दिन तक चला विधानसभा सत्र का बुधवार को समापन हो गया ।विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने बताया कि 18 नवंबर को विशेष सत्र के साथ शुरू हुए इस सत्र का 17 दिसंबर को समापन हुआ ।इसकी पहली बैठक 18 नवंबर 2025 को पुरानी विधानसभा भवन में हुई तथा दूसरा कार्य दिवस रविवार 14 दिसंबर 2025 को नवीन विधानसभा में शुरू हुआ किसी विधानसभा का एक सत्र दो भवनों में संपन्न हो यह दुर्लभ  संयोग  है । इस सत्र में कुल पांच बैठकों में लगभग 33 घंटे 33 मिनट चर्चा हुई इस सत्र में 333 तारांकित और 295   अतारांकित  प्रश्न पूछे गए इस तरह से कुल 628 प्रश्नों की सूचनाओं प्राप्त हुई ।इनमें 11 प्रश्नों पर सभी में  अनुपूरक पूछे प्रश्न पूछे गए ।ध्यान आकर्षण की कुल 232 सूचनाओं प्राप्त हुई ।

वंदे मातरम ने देश की आजादी में बहुत बड़ी भूमिका निभाई

उपमुख्यमंत्री अरुण सामने कहा कि वंदे मातरम महामंत्र है जिसे बोलकर देश की आजादी के लिए नौजवान हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। यह वह शब्द है जिसमें देश की आजादी में बहुत बड़ी भूमिका निभाई ।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि  कैसे कांग्रेस के अधिवेशन में ही वंदे मातरम गीत का गान हुआ था और कैसे 1923 में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम का विरोध हुआ ।

कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा वंदे मातरम को लेकर तीन वर्गों को   दिक्कतें होती हैं  ।एक अंग्रेजों को जैसे कोई गाता था  पीट देते थे, दूसरे मुस्लिम  लीग को और तीसरा ऐसे पक्ष भी जो आजादी के लिए लड़ाई में नहीं थे।