विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र पाहंदा दुर्ग (अ), दुर्ग द्वारा जिले के विकासखण्ड-पाटन के ग्राम-चंगोरी में “मृदा स्वास्थ्य कृषि में उपयोगिता” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषकों को मृदा स्वास्थ्य जाँच की आवश्यकता क्यों है? खेते में क्या-क्या फायदे है कैसे किया जाता है और इसके जाँच की “मृदा हेल्थ कार्ड” का कैसे उपयोग किया जाता है इसकी विस्तृत जानकारी किसानों को दी गई। किसानों के खेत पर प्रायोगिक रूप से मृदा परीक्षण हेतु मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाता है इसकी विस्तृत प्रायोगिक जानकारी दी गई। मृदा स्वास्थ्य पर मृदा वैज्ञानिक डॉ० ललिता रामटेके ने पूर्ण जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर डॉ० मनीष कुमार वर्मा और डॉ० विनय कुमार नायक कृषि वैज्ञानिक सहित अनेक किसान भाई उपस्थित थे।
इसी अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र पाहंदा दुर्ग (अ), दुर्ग के सभागार में मृदा स्वास्थ्य दिवस पर विशेष परिचर्चा भी आयोजित की गई जिसमें पाटन क्षेत्र के समस्त कृषि विस्तार अधिकारी सहित कृषकों ने भी भाग लिया। कृषकों को “छत्तीसगढ़ खेती” इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका एवं ‘साईल हेल्थ कार्ड” वितरित किये गये। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ० विजय जैन ने साईल हेल्थ कार्ड के जमीनी स्तर पर उपयोग और आने वाली समस्याओं पर चर्चा की। डॉ० ईश्वरी कुमार साहू, कृषि वैज्ञानिक ने जैविक खाद से मृदा संरचना सुधार पर चर्चा की। डॉ० ललिता रामटेके, मृदा वैज्ञानिक ने कम लागत के “हीप मेथल” से केचुआ खाद पर चर्चा की। केन्द्र के डॉ० आरती टिकरिहा, सृष्टि तिवारी सहित पाटन क्षेत्र के कृषि विभाग प्रमुख श्री मुकेश मडरिया सहित सभी कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित थे।







