अंडा। ग्राम ओटेबंद बगिचा में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का समापन अंतिम दिवस पर भक्ति, भाव और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर तुलसी वर्षा एवं श्रीमद्भगवद्गीता प्रवचन मुख्य आकर्षण रहे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
पूज्य संत श्री राजीव नयन जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) ने अंतिम प्रवचन में गीता के अमृत वचनों का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्म को भगवान को समर्पित करते हुए निष्काम भाव से कार्य करना चाहिए। जब कर्म में भक्ति जुड़ जाती है, तब जीवन सफल हो जाता है।
भागवत कथा में परीक्षित के रूप में बैठे देवरी निवासी शेरसिंह देशमुख, तेजिया बाई देशमुख बैठे हैं।
महाराज श्री ने कहा कि कलियुग में नामस्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है। श्रीकृष्ण का नाम स्वयं में मंत्र है और गीता उसका मार्गदर्शक प्रकाश। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन कुछ समय गीता पाठ और भजन-कीर्तन को अवश्य दें।
कथा के समापन अवसर पर हुई तुलसी वर्षा ने पूरे पंडाल को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत पुण्यदायी क्षण मानते हुए श्रद्धा भाव से तुलसी पत्तों को ग्रहण किया। पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
समापन अवसर पर भव्य आरती, भजन-कीर्तन एवं प्रसाद वितरण भी किया गया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार ओटेबंद में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का यह आध्यात्मिक महोत्सव श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। समापन के अवसर पर सभी आस पास के ग्रामीण जनों को महाप्रसादी भंडारा वितरण किया गया। इस 11 दिवसीय भव्य महायज्ञ व मेला में मंदिर के सभी सदस्य व गुण्डरदेही पुलिस का शिषेश सहयोग रहा।







