हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने से कांग्रेस की खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस नहीं आएगी : विजय साहू

भिलाई नगर। भाजपा नेता एवं छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों के परिणामों को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को अब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में अपने प्रदर्शन पर भी गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए।

श्री साहू ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की कुल 28 विधान परिषद सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा और महज एक सीट जीत पाई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से हुआ, तब भी कांग्रेस अपेक्षित सफलता क्यों हासिल नहीं कर सकी?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वास्तविक चुनौती मतदान की मशीन नहीं, बल्कि जनता से कमजोर होता संवाद और संगठन की जमीनी स्थिति है। चुनाव परिणामों के बाद मतदान प्रणाली को विवाद का विषय बनाने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व को अपनी नीतियों, कार्यशैली और जनसंपर्क की समीक्षा करनी चाहिए।

साहू ने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है। किसी भी दल को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। चुनावी हार को ही अनियमितता का प्रमाण मान लेना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक कमजोरियों का समाधान चुनावी व्यवस्था में नहीं, बल्कि अपने संगठन और जनता के बीच तलाशना चाहिए। केवल आरोप-प्रत्यारोप से किसी राजनीतिक दल की विश्वसनीयता मजबूत नहीं होती।

श्री साहू ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास जवाबदेही, जनसंपर्क और जनहित के विषयों पर निरंतर कार्य करने से अर्जित होता है। कांग्रेस को ईवीएम पर आरोप लगाने से अधिक ध्यान अपने राजनीतिक प्रदर्शन और संगठनात्मक स्थिति पर देना चाहिए।