दुर्ग।
समग्र शिक्षा जिला कार्यालय दुर्ग एवं अह्वान संस्था के संयुक्त प्रयास के अंतर्गत आज दुर्ग जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों एवं संकुल समन्वयकों की विकासखंड स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में समग्र शिक्षा के एपीसी डॉ. शशिभूषण शर्मा, विकासखंड स्रोत समन्वयक नेम सिंह साहू एवं श्रवण सिन्हा, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के संकुल समन्वयक तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

बैठक का उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को सशक्त बनाना, बालवाड़ी पाठ्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा वर्षभर संचालित होने वाली प्रशिक्षण योजना से शिक्षकों को अवगत कराना था। प्रशिक्षण में बालवाड़ी पाठ्यक्रम का अभिमुखीकरण, शिक्षकों की भूमिका, विभिन्न प्रशिक्षण प्रारूपों एवं कक्षा 1 एवं 2 की नमूना पाठ योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ऑफलाइन प्रशिक्षण, ज़ूम मास्टरक्लास, कक्षा अवलोकन तथा व्हाट्सएप आधारित पीयर लर्निंग ग्रुप जैसे प्रशिक्षण प्रारूपों की जानकारी दी गई। साथ ही बालवाड़ी पाठ्यक्रम के सात प्रमुख घटकों—सर्कल टाइम, संज्ञानात्मक विकास, फ्री प्ले, भाषा विकास, आउटडोर गतिविधियाँ, रचनात्मक अभिव्यक्ति एवं समापन सर्कल टाइम—को नियमित रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।
समग्र शिक्षा के एपीसी ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालयों में नामांकन बढ़ाना सभी शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बालवाड़ी को बच्चों की शिक्षा की मजबूत नींव बताते हुए नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं पाठ्यक्रम के अनुरूप दैनिक गतिविधियों के प्रभावी संचालन पर बल दिया। वहीं विकासखंड स्रोत समन्वयक नेम सिंह साहू एवं श्रवण सिन्हा ने भी शिक्षकों से निर्धारित पाठ्यक्रम एवं दैनिक समय-सारिणी के अनुरूप कार्य करने, बालवाड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए नवाचारी प्रयास करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण में अह्वान ट्रस्ट की ओर से बालवाड़ी जिला समन्वयक शीतल मोटघरे एवं प्रदीप शर्मा ने तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया। वहीं विनोबा भावे प्रोग्राम से अनन्या सिंह ने शिक्षकों को ऑनलाइन एप के प्रभावी उपयोग, डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

बैठक के अंत में शिक्षकों एवं संकुल समन्वयकों ने बालवाड़ी एवं प्रारंभिक कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने, नामांकन बढ़ाने तथा प्रशिक्षण में प्राप्त सीख को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया।






