रायपुर। राजधानी रायपुर के माना इलाके के नकटी गांव में विधायक कॉलोनी बनाने लिए 80 से अधिक घर तोड़ दिए गए। जिसमें पीएम और इंदिरा आवास के घर भी शामिल हैं। प्रशासन ने यहां 1000 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किये थे। जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह घर तोड़ने पहुंची जेसीबी मशीनों के सामने खड़े हो होकर नागरिकों ने विरोध किया। जिसके बाद पुलिस और ग्रामीणों के बीच भारी धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ। कार्रवाई के बाद ग्रामीण पास में ही धरने पर बैठ गए हैं। कुछ समय बाद लोगों के घरों के बाहर हलचल बढ़ गई। किसी ने सामान समेटना शुरू किया तो कोई अपने बच्चों को संभालता नजर आया। कई महिलाओं की आंखों में आंसू थे और बुजुर्ग चुपचाप अपने घरों को निहारते रहे। बुलडोजर कार्रवाई के बीच सबसे ज्यादा दर्द उन लोगों के चेहरों पर दिखा, जिन्होंने सालों की मेहनत से अपने घर बनाए थे। किसी ने मजदूरी करके ईंटें जोड़ीं, किसी ने छोटी-छोटी बचत से छत डलवाई। उनके लिए यह मकान केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की कमाई और यादों का हिस्सा था।

प्रशासन अपने स्तर पर इसे सरकारी प्रक्रिया बता रहा है, जबकि प्रभावित परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रभावित लोगों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है और उनके सामने खड़े सवालों का समाधान कैसे निकलता है।
रायपुर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर प्रशासन का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी है और यहां प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का निर्माण किया जाना है। अधिकारियों के अनुसार सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। पूरे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
इधर जिला प्रशासन का दावा है कि नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था शुरु कर दी है। प्रशासन के अनुसार परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है। आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है।






