रायपुर में हाइड्रोपोनिक्स पर तीन दिवसीय कार्यशाला, आधुनिक नर्सरी विकास की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने आधुनिक नर्सरी विकास और मिट्टी रहित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। यह कार्यशाला 18 से 20 दिसंबर तक आयोजित की गई, जिसमें पौध उत्पादन के वैज्ञानिक और उन्नत तरीकों की जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य जल व भूमि संरक्षण के साथ महिला स्व-सहायता समूहों और किसानों की आजीविका को मजबूत करना है।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और सोलराइट जैसे माध्यमों का प्रयोग कर पौध रोपण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सॉफ्टवुड और हार्डवुड दोनों तरह के पौधों को तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई गई। इसके साथ ही पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए पोषक तत्वों से युक्त घोल तैयार करने और उसके उपयोग की विधि भी बताई गई।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के विभिन्न तरीकों का अभ्यास कराते हुए विशेषज्ञों ने ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के महत्व को भी समझाया। बताया गया कि यह प्रणाली कम पानी में पौधों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने में सहायक है, जिससे जल संरक्षण संभव हो पाता है।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए हाइड्रोपोनिक इनडोर सजावटी पौधों को निगम द्वारा स्मृति-चिन्ह के रूप में वितरित किया जाएगा। साथ ही भविष्य में इन पौधों को बाजार में उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है, जिससे निगम को अतिरिक्त आय के साथ पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। निगम के प्रबंध संचालक प्रेम कुमार के मार्गदर्शन में विभिन्न मंडलों में हाइड्रोपोनिक्स आधारित आधुनिक नर्सरियों के विकास की तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।

आगामी योजना के तहत निगम द्वारा किचन गार्डन और टेरेस गार्डन को बढ़ावा देने के लिए परामर्श सेवाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। कार्यशाला में विभिन्न मंडलों के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी शामिल हुए और उन्होंने इस आधुनिक तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, टिकाऊ पौध उत्पादन और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में राज्य की महत्वपूर्ण कोशिश मानी जा रही है।