रायपुर।छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस ने इस विषय पर चर्चा कराने के लिए स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं मानते हुए अस्वीकार कर दिया।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सदन में कहा कि राम मंदिर से देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है और यदि चढ़ावे में अनियमितता के आरोप लगे हैं तो इस पर चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी मंदिर निर्माण और दान में योगदान दिया है, इसलिए उनकी भावनाओं से जुड़े इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस की मांग का भाजपा विधायकों ने विरोध किया। अजय चंद्राकर ने कहा कि यह विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसके कार्यकाल के दौरान चंदे और आर्थिक मामलों पर सवाल उठाए।
बहस के दौरान भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने भी कांग्रेस की राम मंदिर को लेकर पुरानी राजनीतिक भूमिका का जिक्र किया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि यदि दान राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उस पर चर्चा से परहेज नहीं होना चाहिए।
सदन में दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मामला राज्य सरकार के दायरे में नहीं आता, इसलिए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद सदन की कार्यवाही नियत एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ाई गई।






