पाटन — जिला सहकारी केंद्रीय बैंक जिला दुर्ग के पूर्व अध्यक्ष जवाहर वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए ‘एग्रीस्टेक पंजीयन’ (AgriStackRegistration) के नियमों को लेकर विष्णुदेव साय सरकार द्वारा लिया गया यू-टर्न पूरी तरह से अदूरदर्शिता और प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। बीते मई महीने से किसान इस जटिल प्रक्रिया के कारण लगातार परेशान हो रहे थे। पहले संयुक्त खातेदारों की अनिवार्यता जैसी कठिन शर्तें थोपकर किसानों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया, और अब जब अधिकांश किसान परेशानी झेलकर किसी तरह अपना पंजीयन करा चुके हैं, तब सरकार ने यह अनिवार्यता खत्म कर केवल लंबरदार का पंजीयन मान्य करने का आदेश जारी किया है।यह संशोधन स्वागत योग्य नहीं, बल्कि किसानों के साथ एक भद्दा छलावा है। जब प्रक्रिया का अंत यही होना था, तो महीनों तक किसानों को कागजी कार्रवाई और दफ्तरों के चक्कर कटवाकर उनके समय और पैसे की बर्बादी क्यों की गई? सरकार और आपदा एवं राजस्व प्रबंधन विभाग को अपनी इस अदूरदर्शिता और गलत नियम थोपने के लिए छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।अधिकांश किसानों ने मजबूरी और परेशानी सहकर पहले ही एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन करा लिया है। अब गिनती के किसानों का पंजीयन बचा है, ऐसे में अंतिम समय में आकर नियम बदलना सरकार की लचर कार्यशैली का प्रमाण है। यदि शासन को नियम में राहत ही देनी थी, तो सीजन की शुरुआत में ही किसानों को यह सुविधा मिलनी चाहिए थी। कांग्रेस पार्टी और हम सभी किसानों के हित में सरकार से मांग करते हैं कि वह अपनी ऐसी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली पर आत्ममंथन करे, जिससे किसानों को हर कदम पर केवल उत्पीड़न का सामना करना पड़े।







