सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के सम्बंध में *छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 278* में संशोधन किया है जो 21 अगस्त 2025 से पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावशील हो गया है अब प्रत्येक जन्म और मृत्यु के सम्बंध में परिवार के मुखिया या माता-पिता के द्वारा 8 दिनों के भीतर नजदीकी जन्म-मृत्यु पंजीयन संस्था में लिखित रूप में सूचना देना अनिवार्य हैं।यदि सूचनाकर्ता द्वारा उक्त अवधि में सूचना देने असफल रहता है तो पूर्व में नगरपालिका अधिनियम की धारा 278 में *पचास रुपए* का जुर्माना का प्रावधान को बढ़ाकर *एक हजार रुपये* कर दिया गया है।
राजपत्र में स्पष्ट किया कि यदि जन्म या मृत्यु की सूचना देने में देरी होती है, तो संबंधित व्यक्ति से एक हजार रुपए जुर्माना की राशि वसूली जाएगी।
समय पर पंजीकरण न करवाने से होती हैं दिक्कतें
जन्म और मृत्यु का पंजीकरण आवश्यक है, क्योंकि इन प्रमाण पत्रों की आवश्यकता निजी कार्यों के अलावा सभी शासकीय योजनाओं में भी दस्तावेजों में के रूप पड़ती है। लेकिन आमतौर पर जन्म-मृत्यु पंजीकरण में लापरवाही बरती जाती है, जिससे बाद में परेशानी होती है। नगर पालिका परिषद गौरेला के सीएमओ ने कहा कि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर करवाना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनावश्यक समस्या से बचा जा सके।







