छत्तीसगढ़ की पहली वैज्ञानिक OSL तिथि : गितारी से प्राप्त 33,000 वर्ष पूर्व के उत्तर पुरापाषाणकालीन साक्ष्य पर पोलैंड में प्रस्तुत होगा शोध..शोधार्थी मोहम्मद जाकिर करेंगे प्रस्तुत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक पुरातत्व के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में हसदेव नदी घाटी के गितारी पुरास्थल से प्राप्त लगभग 33,000 वर्ष पूर्व की वैज्ञानिक OSL तिथि पर आधारित शोध आगामी XXI UISPP World Congress, पॉज़्नान, पोलैंड में प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रस्तुति 1 सितंबर 2026 को शोधार्थी मोहम्मद जाकिर खान द्वारा की जाएगी।

प्रस्तुत शोध का शीर्षक “Upper Palaeolithic Evidence from Gitari, Hasdeo River Valley, Chhattisgarh: Lithic Technology and New OSL Chronology in Central India” है। शोध में गितारी पुरास्थल से प्राप्त उत्तर पुरापाषाणकालीन साक्ष्यों, पाषाण उपकरण तकनीक तथा नई OSL काल-निर्धारण के आधार पर मध्य भारत के प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक क्रम को समझने का प्रयास किया गया है।

मोहम्मद जाकिर खान के व्यापक शोध में हसदेव नदी घाटी के 43 प्रागैतिहासिक स्थलों का दस्तावेजीकरण तथा 8,238 पाषाण उपकरणों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी विश्लेषण किया गया है।

इस अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक पुरातत्व, विशेषकर हसदेव नदी घाटी की पुरापाषाणकालीन सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक अकादमिक मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। गितारी से प्राप्त वैज्ञानिक काल-निर्धारण मध्य भारत में उत्तर पुरापाषाणकालीन मानव गतिविधियों, पाषाण तकनीक और सांस्कृतिक विकास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।मोहम्मद जाकिर खान को XXI UISPP World Congress में भाग लेने के लिए Type B Bursary भी प्रदान की गई है।

आधिकारिक पुष्टि के अनुसार इस सहायता में कांग्रेस शुल्क में छूट, आगमन के बाद पात्र खर्चों के आधार पर यात्रा सहायता तथा कांग्रेस स्थल पर निःशुल्क आवास शामिल है।यह प्रस्तुति न केवल शोधकर्ता के अकादमिक कार्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान है, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक पुरातत्व को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।