छिंदीडीह पंचायत विकास से उपेक्षित। अब तक नहीं पहुंची बिजली ,कलेक्टर से लेकर हर जगह जा चुके हैं ग्रामीण


पंडरिया-ब्लाक के वनांचल ग्राम छिंडीडीह ब्लाक मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर घने वन व पहाड़ियों के बीच स्थित है।जहां आज तक बिजली सुविधा नहीं पहुंची है।छिंदीडीह की आबादी करीब 450 है जहां लगभग 60 परिवार निवास करते हैं।गांव में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर पैनल लगाकर बिजली दी जाती है,किन्तु यह अपर्याप्त है।लोग जहां आधुनिक उपकरणों व कम्यूटर युग मे पहुंच चुके हैं,वहीं छिंदीडीह में केवल एक बल्ब के लिए बिजली नहीं मिल पा रही है।घने जंगलों के बीच होने के कारण यहां बिजली और भी जरूरी हो जाता है।अंधेरे में यहां लोगों को हिंसक जानवरों से खतरा बना रहता है।पिछले महीने यहां बाघ द्वारा कुछ मवेशियों के शिकार किया गया था वहीँ हाथियों की मौजूदगी भी यहां बनी रहती है।सौर ऊर्जा मौसम खराब होने पर तथा ज्यादा उपयोग होने पर नहीं चलता।इसी तरह खराब होने पर महीनों तक इसका सुधार नहीं होता है।ग्रामीण शिव ने बताया कि ग्रामीणों को अधिकतर अंधेरे में रहना पड़ता है।उन्होंने बताया कि कई बार कलेक्टर कार्यालय व विद्युत विभाग का चक्कर काट चुके हैं।इसके बावजूद गांव में आज बिजली नहीं पहुंच पाई है।ग्रामीणों ने जल्द ही गांव में बिजली लगाने की मांग की है।
*पंचायत के मोहल्लों भी नहीं है बिजली*-छिंदीडीह पंचायत में कई मोहल्ले हैं जो दूर-दूर स्थित है।लिहाटोला,अमीदा,जखनाडीह, धोबे सभी छिंडीडीह पंचायत के मोहल्ले हैं।किसी भी मोहल्ले में बिजली नहीं है।सभी मोहल्लों की आबादी करीब 900 के करीब होगी।शासन द्वारा बैगा आदिवासी के नाम पर करोड़ों खर्च कर जीवन स्तर उठाने का दावा किया जाता है,किन्तु शासन अब तक बिजली पहुंचाने में भी नाकाम है।
*लिहाटोला पहुंच विहीन है*- छिंदीडीह पंचायत अब तक पहुंच विहीन है।यहां जाने के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।इस मोहल्ले की आबादी लगभग 300 है,जहां शत-प्रतिशत बैगा आदिवासी निवास करते हैं।जन सुविधा के नाम पर यहां केवल 10*16 का एक कमरे वाला प्राथमिक शाला भवन है।जहां पेयजल,बिजली शौचालय जैसे प्राथमिक सुविधा भी बच्चो के लिए नहीं है।उक्त गांव में प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत पक्की सड़क बनाने की मांग भी कई बार की जा चुकी है।बरसात के दिनों में यहां ग्रामीण ब्लाक व तहसील मुख्यालय नहीं आ पाते है।बीमार पड़ने पर मरीज को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर या खाट में रखकर सेंदुरखार मुख्यमार्ग पहुँचना पड़ता है।जिसके बाद ही वाहन सुविधा मिल पाती है।गांव में ग्रामीणों के लिए एक हेण्डपम्प भी नहीं है,जिसके चलते ग्रामीण झिरिया का गंदा पानी पीने मजबूर हैं।इस पंचायत को देखने के बाद विकास के सभी दावे खोखले प्रतीत होते हैं।
“ग्राम पंचायत छिंदीडीह वर्तमान में क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा से उर्जिकृत है।सघन वन होने के कारण वन विभाग से अनुमति पश्चात उच्च कार्यलय द्वारा किसी योजना में शामिल किया जा सकता है।”
मनीष अग्रवाल, एई ,विद्युत वितरण केंद्र पंडरिया।