डोंगरगढ़ क्षेत्र में अवैध लॉजों की बढ़ती संख्या से नागरिक चिंतित, प्रशासन से कार्रवाई की मांग, प्रशासनिक अधिकारियों को सेवा कल्याण परिषद ने सौंपा ज्ञापन

केशव साहू
डोंगरगढ़। धार्मिक नगरी वा पर्यटन क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले डोंगरगढ़ शहर में इन दिनों अवैध रूप से संचालित लॉजों और किराए के कमरों को लेकर नागरिकों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिना वैधानिक अनुमति के कई मकानों और भवनों में लॉज जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे शहर की सामाजिक व्यवस्था और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़ क्षेत्र में लगभग 40 लॉज ऐसे हैं जिनका पंजीयन एवं आवश्यक जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध है ? इन पंजीकृत लॉजों का संचालन निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत किया जाता है। इसके विपरीत शहर के कुछ क्षेत्रों में खासकर कालकापारा में ऐसे मकान और भवन भी हैं जहां बिना किसी अधिकृत अनुमति के कमरों को किराए पर दिया जा रहा है। गैर सरकारी संगठन छत्तीसगढ़ सरकार कल्याण परिषद वा स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन स्थानों पर आने-जाने वालों का कोई विधिवत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, जिससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं।
नागरिकों के अनुसार कालकापारा क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियां सर्वाधिक देखने को मिल रही हैं। लोगों का आरोप है कि कई मकानों में कमरों को लॉज की तरह उपयोग में लाया जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण आसपास रहने वाले परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और सामाजिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शहर के वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डोंगरगढ़ एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु मां बम्लेश्वरी , चंद्रगिरी, प्रज्ञागिरी, जटाशंकर मंदिर शिवधाम पर्वत,सतनाम पहाड़,आदि जगहों में घूमने वा दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि अवैध गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इससे शहर की छवि धूमिल हो सकती है। लोगों का मानना है कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भी ऐसी स्थितियों को देखकर गलत संदेश लेकर लौटते हैं। गैर सरकारी संगठन छत्तीसगढ़ सरकार सेवा कल्याण परिषद व
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रतिदिन राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग डोंगरगढ़ पहुंचते हैं। ऐसे में शहर में संचालित सभी आवासीय और लॉज सुविधाओं का नियमानुसार सत्यापन होना आवश्यक है। लोगों का कहना है कि जहां वैध रूप से लॉज संचालित हो रहे हैं, वहां नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, वहीं बिना अनुमति चल रहे प्रतिष्ठानों की जांच भी आवश्यक है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि नगर पालिका, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर शहरभर में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। जांच के दौरान भवन स्वामियों के दस्तावेज, व्यवसायिक अनुमति, आगंतुकों का रिकॉर्ड तथा अन्य आवश्यक नियमों के पालन की समीक्षा की जाए। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
नागरिकों का यह भी कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था किए जाने से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि डोंगरगढ़ जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के शहर की गरिमा को बनाए रखने के लिए इस विषय को गंभीरता से लिया जाए तथा आवश्यक कदम उठाए जाएं।
शहरवासियों का मानना है कि प्रशासनिक सतर्कता, नियमित जांच और जनसहयोग के माध्यम से इस समस्या का समाधान संभव है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, ताकि डोंगरगढ़ की स्वच्छ और सम्मानजनक पहचान को सुरक्षित रखा जा सके।