पाटन से बलराम यादव की रिपोर्ट: आज 26 अप्रैल को प्रदेश के मुख्यमंत्री बिष्णु देव साय का पाटन आगमन प्रस्तावित है। उनके दौरे को लेकर क्षेत्र में उत्साह के साथ-साथ लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। पाटन के नागरिकों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री उनके क्षेत्र की समस्याओं को सुनेंगे और पूर्व में स्वीकृत अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने की दिशा में ठोस पहल करेंगे।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में पाटन क्षेत्र में कई बड़े निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई थी। इनमें से कई कार्य शुरू भी हुए, लेकिन शासन परिवर्तन के बाद इनकी रफ्तार धीमी पड़ गई या फिर अतिरिक्त राशि की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अधूरे ही रह गए। इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
इन प्रमुख कार्यों पर ध्यान अपेक्षित
पाटन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आज भी अधूरी हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है—
पंदर दैमार चौक में बन रहा ऊर्जा पार्क लगभग 80 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, लेकिन बाहरी सौंदर्यीकरण, बागवानी और रंग-रोगन का कार्य अभी बाकी है।
पाटन, मर्रा और रानीतराई में निर्मित इनडोर स्टेडियमों का कार्य कई स्थानों पर अधूरा है, वहीं कुछ का लोकार्पण भी अब तक नहीं हो पाया है।
तरीघाट रेस्ट हाउस का लोकार्पण होने के बावजूद यहां कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से यह अधिकांश समय बंद रहता है। आगेसरा रेस्ट हाउस की स्थिति भी ऐसी ही है।
पाटन में बने विभिन्न गार्डनों के रखरखाव के लिए राशि की आवश्यकता है। स्वीकृति के अभाव में ये गार्डन धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
केसरा और ओदरागहन में सौर सुजला योजना के तहत लगाए गए सौर पैनलों के रखरखाव के लिए भी पर्याप्त बजट की जरूरत है।
पाटन ब्लॉक के अनेक गांवों में रीपा (RIPA) योजना के तहत शुरू किए गए कार्य भी अधूरे पड़े हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे से क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि इन अधूरे कार्यों को लेकर ठोस निर्णय लिए जाएंगे, जिससे पाटन क्षेत्र को विकास का वास्तविक लाभ मिल सके।







