नियमिकरण मांग को लेकर निकले दांडी यात्रियों का गांव गांव में हो रहा स्वागत, आंदोलनरत मनरेगा कर्मचारियों ने दंतेवाड़ा से फरसगांव पहूंचते ही हुआ भव्य स्वागत

आशीष दास

कोडागांव/फरसगांव । नियमितीकरण की मांग को लेकर दांडी यात्रा में निकले मनरेगा कर्मचारियों का गांव गांव में भव्य स्वागत किया जा रहा है इसी कड़ी में जनपद पंचायत फरसगांव में डांडी यात्रियों के पहुंचते ही पुष्पहार, आतिशबाजी एवं मांदरी नृत्य के साथ उनका गर्मजोशी से भव्य स्वागत किया गया। दांडी यात्रा फरसगांव नगर पहुंचने से पहले भैरव मोड़ के पास 200 किमी माइलस्टोन पर केक काटकर सफलतम रायपुर तक पदयात्रा का जश्न मनाते हुए भूपेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

मौके पर भाजपा द्वारा दिया दांडी यात्रियों को दिया समर्थन-

इस दौरान भाजपा द्वारा डांडी यात्रियों को फूल माला पहनाकर उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए उनको समर्थन दिया। मौके पर प्रवीर सिंह बदेशा, तरुण साना, हरिशंकर नेताम, प्रशांत पात्र, गणेश दुग्गा, सुकलाल मरकाम, विश्वनाथ सिकदार, हेमचंद देवांगन, मंजू लता मरकाम, चिंतामणि, सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित होकर दांडी यात्रियों को फल वितरण किया गया।

मनरेगा कर्मियों का आंदोलन ले रहा जन आंदोलन का रुप-

ज्ञात हो कि 4 अप्रैल से राज्य भर में मनरेगाकर्मी अपनी 2 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल में है। जिसके चलते कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहे है। वहीं दूसरी ओर मनरेगा कर्मियों का हड़ताल अब धीरे धीरे और भी प्रभावी होते हुए जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है।

ऐसा हम इसलिए कह रहे है चूंकि दंतेवाड़ा से पैदल चल कर रायपुर के लिए निकले दांडी यात्रियों का रास्ते मे पड़ने वाले गाँव-गाँव नगर-नगर गाजे बाजे और फटाके फोड़कर फूलों की वर्षा करते हुए स्वागत किया गया जा रहा है। अपनी मांगों के लेकर 40 डिग्री के तापमान पर चल रहे इन कर्मचारियों के पैरों में छाले लिए ग्रामीण और आम जनमानस में मन में सहानुभूति पैदा हो रही है, और वो इनके समर्थन में आते जा रहे है, वही दूसरे संभागों में भी लगातार जल सत्याग्रह, हस्ताक्षर अभियान, पोस्ट कार्ड अभियान के अलावा सोसल मीडिया में लगातार ये कर्मचारी आम जनता तक अपनी मांगों को समझा पाने व समर्थन प्राप्त करने में सफल हो रहे है। प्रदेश सचिव संघ और तमाम राजनीतिक दलों ने इनकी मांगों का खुला समर्थन किया है।

ऑनलाइन रिपोर्ट को गौर करे तो छत्तीसगढ़ राज्यभर में विगत वित्तीय वर्षो में इस सीजन में प्रति दिवस लगभग 15 लाख से ऊपर मजदूर मनरेगा अंतर्गत कार्य करते है। किन्तु 18 अप्रैल को छत्तीसगढ़ राज्य के किसी भी जिले में एक भी मनरेगा के मजदूर कार्यरत नही है।

18अप्रैल रहा मनरेगा का शुन्य कार्यदिवस_

सूत्रों के अनुसार 18 अप्रैल 2022 का दिन छत्तीसगढ़ मनरेगा के इतिहास में एक भी मजदूर को काम नहीं दे पाने के नाम पर दर्ज हो गया है। विगत 16 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि कार्य दिवस में मजदूरों की संख्या शून्य है। निश्चित रूप से यह मनरेगा कर्मियों के हड़ताल को ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मचारी संगठनों का लगातार मिल रहे समर्थन का ही नतीजा है।