राकेश कुमार

कुम्हारी । निकटवर्ती ग्राम उरला बी. एम. वाय. में मृत्यु के महत्व एवं वास्तविकता को प्रतिपादित करते हुए तपस्वी सेवाभावी उपप्रवर्तक डॉ. परम पूज्य श्री सतीश मुनिजी म.सा. ने श्री रतन गुरु पावनधाम श्री मंगल साधना केन्द्र “मंगलम” में स्वाध्याय के मध्य में व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु जीवन की वास्तविक सच्चाई है। सप्त भयों में मृत्यु को महाभय के रूप में धर्मशास्त्रों में माना गया है। मृत्यु में छुपा और बचा नहीं जा सकता । संसार के सारे जीव जीना चाहते है मृत्यु को प्राप्त होना नहीं चाहते। परन्तु जीवन का मूल्य मृत्यु से ही है। मृत्यु के बिना जीवन की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने आगे फरमाया कि मृत्यु से भयभीत नहीं हों, मृत्यु के बिना इस संसार को शाश्वत सिध्दानचं “जातस्य ध्रुव मृत्यु” जिसने जन्म लिया यह अवश्य ही एक न एक दिन मृत्यु को प्राप्त होगा यह ध्रुव सत्य है वह मिथक हो जाता । गहराई पूर्वक देखने पर ज्ञात हो जाता है कि अगले जीवन की नये तरीके से शुरुआत है । चिरूपड़ा का नाम ही मृत्यु है । अगर मृत्यु नहीं होती तो कभी रिक्त भी नहीं होता । रिक्तता है तो उसकी पूर्ति स्वयं प्रकृति करती है जिसने मृत्यु को समझ लिया उसने सारे धर्म शास्त्रों को समझ लिया हंसते खिलखिलाते हुए स्वेच्छा पूर्वक बिना किसी कामना से जो मृत्यु को आमंत्रण देता है वह सफल जीवन जीने के रहस्य को प्राप्त करता है और उसे पर अपने कदम रख कर अन्यों के लिए आदर्श स्तंभ बन जाता है । इस अवसर पर गायक पूज्य श्री शुक्ला मुनी मं.सा. विद्याभिलाषी पूज्य श्री आदित्य मुनि मं. सा. स्वाध्यायी पूज्य श्री रमन मुनि जी मं.सा. के अतिरिक्त आशीष चोपड़ा कृष्ण गज्जर, ओमप्रकाश गुज्जर सहित अनेक श्रद्धालु जन उपस्थित थे इस बीच चरोदा, भिलाई, कुम्हारी, उरला के अनेकानेक श्रद्धालु जनों का आवागमन भी दिन भर चलता रहा ।






