संतान प्राप्ति सहित अन्य मनोकामना पूरी होने के बाद मिट्टी से बनी हाथी और घोड़े की मूर्ति चढ़ाते हैं श्रद्धालु ..36 गढ़ में से एक मेहंदीगढ़ यहां, जिससे प्रदेश में मोहंदीपाट की पहचान



संजय साहू/राजेंद्र साहू/अंडा। मैं मोहंदीपाट हूं… मेरी पहचान मेहंदीगढ़ के राजा मोहंदीपाट बाबा की वजह से प्रदेशभर में होती है। छत्तीसगढ़ की पहचान 36 गढ़ से होती है। मान्यता है कि 36 में से 18 गढ़ शिवनाथ नदी के उस पार पूर्व दिशा में है और 18 गढ़ पश्चिम दिशा में है। जिसमें मेहंदीगढ़ भी शामिल है। जिसकी पहचान वर्तमान में मोहंदीपाट के रूप में होती है। बाबा के अलावा अन्य देवी-देवताओं के मंदिर है। मंदिर केसामने हर साल देव मंडई मेला महोत्सव का आयोजन होता है। जिसमें धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, खैरागढ़, मानपुर मोहला, अंबागढ़ चौकी, कांकर सहित प्रदेश के 12 जिले के लोग शामिल होते हैं। तीन दिन तक मेला लगता है। इस बार 25, 26, 27 को मेला लगेगा। 26 अक्टूबर को मुख्य मेला है। जिसमें प्रदेश के अन्य जिले के लोग शामिल होकर मनोकामना पूरा होने पर मिट्टी से तैयार घोड़े, हाथी की मूर्ति चढ़ाएंगे। यहां बरसों पुरानी अखरा, पखरा नाम के दो खड़ी पत्थर आज भी सुरक्षित है। जहां आस्था के चलते लोग दीप जलाकर रखते है। मोहंदीपाट बाबा के धार्मिक स्थल में आम लोगों के अलावा पूर्व सीएम भूपेश बघेल, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद सहित कई जनप्रतिनिधि घोड़े की मूर्ति चढ़ा चुके हैं।

शौचालय बनाने पर अंग्रेजों को नुकसान हुआ था. जिस जगह पर धार्मिक स्थल है, वहां अंग्रेजों ने शौचालय बनाया था, तब नुकसान हुआ था। इस वजह से शौचालय को तोड़ने की नौबत आई थी। पहले गांव में रात में बाबा जब भ्रमण करने निकलते थे, तब घोड़े की घुंघरू स्पष्ट सुनाई देती थी। यहां संतान प्राप्ति, बच्चों की समस्याओं व अन्य मनोकामना के लिए प्रदेशभर के लिए लोग पहुंचते हैं। नवरात्र में 300 से ज्यादा ज्योति कलश प्रज्जवलित होती है।

मातर उत्सव को लेकर मंदिर में तैयारियां चल रही है।

*इस मेला में बहुत दूर दूर से झुला, मीना बाजार वाले लोग आते हैं, झुला का पुरी तैयारी हो चुका हैं*

मोहंदीपाट की देव मड़ई प्रदेशभर में प्रसिद्ध मोहंदीपाट की देव मड़ई प्रदेशभर में प्रसिद्ध है। दिवाली के दूसरे दिन से गांवों में
मातर उत्सव के साथ मंडई मनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। गांवों में मातर, मेला, मंडई छत्तीसगढ़ की संस्कृति है। यहां
बालोद जिला मुख्यालय से दूरी-49 किलोमीटर कनेक्टिविटी-बालोद-दुर्ग मार्ग से गुंडरदेही होते और दुर्ग से अण्डा गांव होते हुए यहां पहुंच सकते हैं। प्रसिद्ध-मेहंदीगढ़ के राजा मोहंदीपाट बाबा का मंदिर।