केशव साहू
श्रीकथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन गुरु-दीक्षा, भक्ति एवं सेवा का दिया संदेश

डोंगरगढ़। जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से कृषि उपज मंडी, नया बस स्टैंड के पास, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव में आयोजित तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा के दौरान प्रवचनकार ज. न. म. प्रवचनकार ज्ञानेश्वर जाधव ने गुरु की महिमा, गुरु-दीक्षा, भक्ति एवं सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रवचनकार ज्ञानेश्वर जाधव ने कहा कि मनुष्य के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु से प्राप्त भक्ति ही जीवन के वास्तविक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है तथा व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में योग्य गुरु से गुरु-दीक्षा अवश्य ग्रहण करनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी से दीक्षित होकर गुरु परंपरा से जुड़ने तथा धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। कथा के अंतिम दिवस नामदान विधि संपन्न होगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान कर उसे धर्म, भक्ति एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। सद्गुरु की शरण में जाकर गुरु-दीक्षा ग्रहण करना जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार है। गुरु की कृपा से मनुष्य का जीवन सफल, सार्थक एवं कल्याणमय बनता है।
प्रवचनकार ने कहा कि कलियुग में मनुष्य के जीवन को सही दिशा देने के लिए सद्गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी का संदेश है कि मनुष्य के अंतरमन और बहिरमन में एकाग्रता का अभाव ही उसके अधिकांश दुःखों का कारण बनता है। मन का स्वाभाविक गुण चंचलता है, जो व्यक्ति को उसके लक्ष्य से विचलित कर देता है। इसलिए सद्गुरु की शरण में रहकर भक्ति का मार्ग अपनाना आवश्यक है। भक्ति ही अंतरमन और बहिरमन को एकसूत्र में बांधती है, जिससे निर्णय क्षमता, विवेक, आत्मसंयम, उत्साह, साहस तथा सकारात्मक चिंतन का विकास होता है और मनुष्य का जीवन सत्पथ की ओर अग्रसर होता है।
रासलीला एवं ‘श्री लीलामृत’ के दिव्य प्रसंगों से भक्तिमय हुआ वातावरण
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने रासलीला का भावपूर्ण रसास्वादन किया तथा भक्तिभाव से विभोर होकर नृत्य किया। साथ ही जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी द्वारा रचित ‘श्री लीलामृत’ ग्रंथ के दिव्य प्रसंगों का रसपान कर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। भजन, संकीर्तन एवं भक्तिमय वातावरण से पूरा कथा परिसर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा।
लोककल्याणकारी सेवाओं की दी जानकारी
प्रवचन के दौरान बताया गया कि जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी की प्रेरणा से संस्थान देश-विदेश में अनेक लोककल्याणकारी एवं मानवतावादी उपक्रम संचालित कर रहा है। संस्थान द्वारा निःशुल्क अन्नदान सेवा, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, रक्तदान शिविर, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण तथा निःशुल्क वैद्यकीय सेवाएं निरंतर संचालित की जा रही हैं।
संस्थान द्वारा अब तक 1,56,129 से अधिक परिवारों की घर-वापसी, 231 देहदान, 193 अवयवदान तथा जनवरी 2026 में मात्र 15 दिनों में 1,71,150 यूनिट रक्तदान एवं 5 जुलाई से 19 जुलाई 2026 के केवल 15 दिनों में 6,18,009 पौधों का वृक्षारोपण जैसे उल्लेखनीय कार्य किए जा चुके हैं। जरूरतमंद मरीजों के लिए Blood In Need हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है।
इस अवसर पर रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़ के उपपीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी, पीठ सदस्य सच्चिदानंद उपासने, पीठ सह प्रमुख मुन्नालाल मोटघरे, पीठ व्यवस्थापक प्रकाश अंगाडे सहित सभी जिलों के अध्यक्ष, निरीक्षक, समिति सदस्य एवं छत्तीसगढ़ तथा अन्य राज्यों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन 11, 12 एवं 13 अगस्त 2026 तक कृषि उपज मंडी, नया बस स्टैंड के पास, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव में किया जा रहा है। कथा के अंतिम दिवस नामदान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।






