छत्तीसगढ़ में निकेल, क्रोमियम और PGE की खोज: महासमुंद में 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में मिली खनिजीकृत पट्टी

राजू वर्मा

सीजी मितान न्यूज़

छत्तीसगढ़ ने खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह क्षेत्र में मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड द्वारा निकल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्वों की पुष्टि की गई है।

महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह क्षेत्र में मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (DGML) द्वारा निकल (Nickel), क्रोमियम (Chromium) और प्लेटिनम समूह के तत्वों (PGE) की पुष्टि की गई है। यह खोज राज्य को रणनीतिक और अत्यावश्यक खनिजों के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभारने की दिशा में बड़ी छलांग मानी जा रही है।

लगभग 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए सर्वेक्षण में करीब 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो 300 मीटर तक गहराई में सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्शाती है। यह क्षेत्र पूर्व में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा G4 स्तर पर चिन्हित किया गया था, जिसके बाद राज्य सरकार के खनिज साधन विभाग ने ई-नीलामी कर DGML को ब्लॉक आवंटित किया।

भालुकोना के निकट ही वेदांता लिमिटेड को पूर्व में आवंटित केलवरडबरी ब्लॉक सहित इस क्षेत्र में रणनीतिक खनिजों का व्यापक विकास संभावित है। राज्य सरकार ने रणनीतिक खनिजों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 50% से अधिक अन्वेषण प्रस्ताव इन्हीं पर केंद्रित किए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस खोज को आत्मनिर्भर भारत मिशन की दिशा में अहम कदम बताया। वहीं खनिज संसाधन विभाग के सचिव पी. दयानंद ने इसे केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों के लिए एक रणनीतिक सफलता बताया।

DGM द्वारा गठित क्रिटिकल मिनरल सेल के माध्यम से अनुसंधान और संस्थागत सहयोग को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक रणनीतिक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में एक अहम स्थान दिला सकती है।