दुर्ग:जिले में 400 केवी विद्युत ट्रांसमिशन टावर परियोजना को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है
19 गांवों के 1500 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं. किसानों का आरोप है कि शासन के आदेश के बावजूद उन्हें अधूरा मुआवजा मिला है. जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है दरअसल, शासन ने 10 मार्च 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि टावर बेस की भूमि के लिए 200 प्रतिशत और तारों के नीचे की भूमि के लिए 30 प्रतिशत मुआवजा किसानों को दिया जाए. लेकिन किसानों का कहना है कि प्रशासन ने इस आदेश का उल्लंघन करते हुए टावर बेस की भूमि के लिए केवल 80 प्रतिशत और तारों के नीचे की भूमि के लिए मात्र 15 प्रतिशत राशि का भुगतान किया है. इस कटौती से किसान नाराज हैं और प्रशासन की इस मनमानी से अन्नदाताओं को भारी नुकसान हो रहा है. अधूरे मुआवजे और फसल नुकसान की भरपाई के बिना आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, जिससे खेती करना मुश्किल हो जाएगा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में विद्युत ट्रांसमिशन टावर और लाइनों के मुआवजे को लेकर किसानों को इसलिए परेशान होना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें तय दिशा-निर्देशों के मुकाबले आधा या कम मुआवजा दिया जा रहा है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्पष्टता की कमी है। नियमों और दिशा-निर्देशों का पेंच: टावर निर्माण और कॉरिडोर (Right of Way) के मुआवजे को लेकर प्रशासनिक और विद्युत विभाग के अधिकारियों के बीच स्पष्ट प्रक्रिया न होने से किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
अगर दो हफ्ते में माग पूरी नहीं हुई तो देवाशीष बघेल (किसान नेता ) अटल सेना दुर्ग जिला के महामंत्री
बिजली टावर परियोजना के खिलाफ किसानों को लेकर प्रदर्शन करेंगे और किसानों द्वारा मुआवजा राशि और अन्य मांगें पूरी न होने पर दो हफ्ते (या तय समय) के भीतर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।







