बोदल में रास्ते की चौड़ाई को लेकर विवाद, अतिक्रमण हटाने तहसीलदार ने दिया आदेश, प्रधानमंत्री आवास निर्माण पर भी उठे सवाल, सात दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश, निर्माण कार्य जारी

पाटन। तहसील पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत मटंग के आश्रित ग्राम बोदल में आम रास्ते की चौड़ाई और कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय पाटन ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202510104500069 (अ-68, वर्ष 2025-26) में आदेश जारी करते हुए संबंधित भूमि से अनाधिकृत कब्जा हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस मामले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकान को लेकर भी सवाल उठे हैं।

20 फीट के रास्ते की चौड़ाई घटकर 3.4 मीटर रहने का दावा

आवेदक दिनेश कुमार नागे, पिता चंद्रिका प्रसाद नागे, निवासी ग्राम बोदेल ने अतिरिक्त तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि अनावेदक अमरदास द्वारा घास भूमि खसरा नंबर 277, रकबा 0.14 हेक्टेयर के एक हिस्से में लगभग 11.5 × 14.09 वर्गमीटर क्षेत्र पर पक्का मकान बनाकर कब्जा किया जा रहा है। आवेदक का कहना है कि इससे आम रास्ते की चौड़ाई प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, गांव का रास्ता पहले लगभग 20 फीट चौड़ा था, जबकि वर्तमान में इसकी चौड़ाई करीब 3.4 मीटर रह गई है। आवेदक ने पुराने मकान के दरवाजे से रास्ते की दूरी 45 से 47 फीट होने का भी उल्लेख किया है।

28 सितंबर को जारी हुआ था अतिक्रमण हटाने का आदेश

आवेदक के अनुसार, शिकायत पर हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त करने तथा दोनों पक्षों के दस्तावेजों के आधार पर 28 सितंबर 2026 को अतिक्रमण हटाने संबंधी आदेश पारित किया गया था। इसके बावजूद कथित रूप से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने और निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की शिकायत की गई। इसके बाद आवेदक ने 21 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त तहसीलदार को आवेदन देकर निर्माण कार्य रोकने और आदेश का पालन कराने की मांग की।

राजस्व प्रकरण में दोनों पक्षों के तर्क दर्ज

न्यायालयीन आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, अनावेदक पक्ष ने अपने जवाब में कहा कि पुराना मकान वर्ष 1960 से पहले से कब्जे में है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2024-25 में स्वीकृति मिलने के बाद पुराने मकान को तोड़कर नया मकान बनाया जा रहा है। अनावेदक पक्ष ने ग्राम पंचायत की बैठक की छायाप्रति का हवाला देते हुए आम रास्ते की चौड़ाई 20 फीट और पुराने घर के दरवाजे से दूरी 47 फीट होने की बात कही।

वहीं, आवेदक दिनेश कुमार नागे ने जवाब में दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास के तहत स्वीकृत क्षेत्रफल से अधिक हिस्से में निर्माण किया जा रहा है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि अनावेदक पक्ष ने अपने जवाब के समर्थन में शपथपत्र प्रस्तुत किए थे। इस प्रकार, रास्ते की वास्तविक चौड़ाई, भूमि की स्थिति और निर्माण की सीमा को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया है।

पटवारी प्रतिवेदन में भूमि और कब्जे का उल्लेख

न्यायालयीन आदेश में हल्का पटवारी के प्रतिवेदन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि खसरा नंबर 277 की घास भूमि पर मकान निर्माण और कब्जे की स्थिति पाई गई। आदेश में दोनों पक्षों को सात दिवस के भीतर कथित अनाधिकृत कब्जे को हटाने अथवा उससे संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं किए जाने पर ग्राम पंचायत बोदेल को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 56 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का उल्लेख किया गया है। कब्जा हटाने के बाद भूमि को मूल स्वरूप में लाने में होने वाले खर्च की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने की बात भी आदेश में कही गई है।

प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति और निर्माण की पात्रता की जांच के निर्देश

21 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन में अतिरिक्त तहसीलदार पाटन ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पाटन को मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थल निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें सड़क की वास्तविक चौड़ाई, अतिक्रमण की स्थिति और निर्माण की वैधानिकता की जांच करने को कहा गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि और निर्माण की पात्रता की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें

ग्राम बोदेल के इस मामले में अब सड़क की वास्तविक चौड़ाई, संबंधित भूमि की स्थिति, प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति और निर्माण की पात्रता की जांच महत्वपूर्ण होगी। प्रशासनिक जांच तथा निर्धारित समयसीमा में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। ग्रामीणों के आवागमन के रास्ते की स्थिति और नियमों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है।