पाटन। ( बलराम यादव)। जनपद पंचायत पाटन के क्षेत्र क्रमांक 4 में होने वाले सदस्य पद के उपचुनाव ने अब पूरी तरह चुनावी रंग पकड़ लिया है। 18 मई नामांकन की अंतिम तिथि है, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। भाजपा, कांग्रेस सहित ने साहू समाज के प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया है।

इस उपचुनाव में सामाजिक समीकरण सबसे अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में पहांदा और सांकरा दोनों गांवों के मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। खास बात यह है कि पहांदा से अब तक तीन प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है और तीनों साहू समाज से हैं। इससे वोटों के बंटवारे की संभावना भी बढ़ गई है।
भाजपा समर्थित प्रत्याशी सुरेंद्र साहू को संगठनात्मक अनुभव और साहू समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का लाभ मिलने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में है। लंबे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण वे कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। वहीं कांग्रेस ने उर्वशी साहू को मैदान में उतारकर सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश की है। उर्वशी साहू के पति पूर्व में जनपद सदस्य चुने गए थे और उनके निधन के बाद ही यह उपचुनाव हो रहा है। गृहणी रही उर्वशी पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं, जिससे चुनाव में भावनात्मक माहौल भी बनता दिखाई दे रहा है।
चुनावी गणित की बात करें तो पहांदा क्षेत्र में साहू समाज के अलावा कुर्मी और यादव मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। वहीं सांकरा गांव का सामाजिक समीकरण इस चुनाव की दिशा तय कर सकता है। सांकरा में लोधी समाज के लगभग 800 मतदाता बताए जा रहे हैं, जबकि सतनामी समाज के करीब 500 वोट हैं। इसके अलावा यादव समाज 80, साहू 60, कुर्मी 70, मेहर 80, ठाकुर 70, सरदार 60 और पटेल समाज के करीब 80 मतदाता हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहांदा में तीन साहू प्रत्याशियों के मैदान में होने से वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है। ऐसे में सांकरा और अन्य गांवों के मतदाता इस चुनाव में “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल मुकाबला भाजपा और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के बीच सीधा नजर आ रहा है, लेकिन जातीय समीकरण और स्थानीय समर्थन चुनाव परिणाम को दिलचस्प बना सकते हैं।





