डॉ लोकेश शरण की किताब “भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की क्रांतिकारी धाराएं” का हुआ विमोचन…अतिथियों ने कहा भारत को एकता के सूत्र में जोड़ने वाला था “स्वतंत्रता संग्राम”

रायपुर।आजादी कैसे मिली? इस सवाल के सुने-सुनाए जवाबों को दरकिनार करते हुए साक्ष्यों पर आधारित ‘भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की क्रांतिकारी धाराएं लिखी गई। करीब 249 साक्ष्यों को जुटाती इस किताब का विमोचन सोमवार को वृंदावन हॉल में श्लोक ध्वनि फाउंडेशन व अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित समारोह में किया गया।
डॉ. लोकेश कुमार शरण इसके लेखक हैं। इसके लिए वे स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान के घरों तक पहुंचे। कई किताबों, अखबारों व पत्रों को भी शामिल किया।

नेशनल व छत्तीसगढ़ आर्काइव्स से कई ऐतिहासिक दस्तावेज जुटाए। इन्हें संकलित कर किताब की शक्ल दी। लेखक का कहना भी है कि अक्सर यही सुना है कि सत्य-अहिंसा से आजादी मिली, लेकिन जिन्होंने इस देश की मिट्टी के लिए रक्त बहाया उनका बलिदान नजरअंदाज करना ठीक नहीं। उन्होंने एक पत्र का जिक्र किया, जिसमें आजादी से पहले अंग्रेज अधिकारी ने लिखा है कि सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज, भारतीय आर्मी समेत कई वजह थी कि अब भारत पर शासन नहीं टिक पाएगा और भारत छोड़ना होगा। वरिष्ठ पत्रकार विश्वेश ठाकरे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

प्रामाणिक इतिहास से राष्ट्रीय अस्मिता का संचार
संघ के डॉ. पूर्णेदु सक्सेना कहते हैं कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम देश को जोड़ने वाली शक्ति है। उसके सत्य व प्रामाणिक इतिहास से राष्ट्रीय अस्मिता का संचार होता है। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी, श्री कुमार पांडेय, डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र, प्रभात मिश्रा, महेंद्र साहू, वैभव बेमेतरिहा, शिव प्रसाद मिश्रा, सुमित शर्मा, अनिल तिवारी भी शामिल रहे।