रायपुर। प्रदेश में मानसून की धीमी शुरुआत और अपेक्षित वर्षा नहीं होने से प्रमुख जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है। स्थिति यह है कि कई महत्वपूर्ण जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य से काफी कम हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार तांदुला जलाशय में वर्तमान में 24.20 फीट, गोंदली जलाशय में 23.90 फीट, खरखरा जलाशय में 12 फीट तथा मटियामोती जलाशय में मात्र 5.50 फीट पानी शेष है। चारों जलाशयों में कुल मिलाकर 65.60 फीट जलभराव दर्ज किया गया है, जबकि इनकी संयुक्त क्षमता 123.30 फीट है। इस हिसाब से जलाशयों में क्षमता से 57.70 फीट कम पानी उपलब्ध है।
पिछले डेढ़ महीने के दौरान जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। गोंदली जलाशय का जलस्तर लगभग 20 प्रतिशत, मटियामोती का 16 प्रतिशत, खरखरा का 14 प्रतिशत तथा तांदुला का लगभग 3 प्रतिशत तक घट चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पिछले वर्ष इसी अवधि में चारों जलाशयों में करीब 120 फीट पानी उपलब्ध था। वर्तमान स्थिति की तुलना में यह लगभग 54.40 फीट अधिक था। एक महीने पहले की तुलना में भी जलस्तर में लगभग 4.94 फीट की कमी दर्ज की गई है।
तांदुला जलाशय में वर्तमान में 131.53 एमसीएम पानी उपलब्ध है, जबकि गोंदली में 48.47 एमसीएम, खरखरा में 38.56 एमसीएम और मटियामोती में 3.72 एमसीएम पानी शेष है। हालांकि तांदुला जलाशय की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है, लेकिन अन्य जलाशयों में जलभराव लगातार घट रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इन जलाशयों पर दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और कबीरधाम जिलों की सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था काफी हद तक निर्भर करती है। गर्मी और वर्षा की कमी के कारण जल उपयोग बढ़ा है, जिससे भंडारण पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। यदि आगामी दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो खरीफ फसलों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जल संसाधन विभाग ने उम्मीद जताई है कि मानसून सक्रिय होने के साथ वर्षा में तेजी आएगी, जिससे जलाशयों का जलस्तर सुधरेगा और किसानों तथा आम नागरिकों को राहत मिल सकेगी।






