संजय साहू

अंडा। बच्चों की संग्रह कुशलता को बढ़ाने की दृष्टि से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कुथरेल में प्रधान पाठक विवेकानंद दिल्लीवार व राष्ट्रीय जनजाति शोधार्थी राम कुमार वर्मा द्वारा बच्चों को भारत में विशेष अवसरों पर जारी किए गए सिक्कों का निरंतर संग्रह कर उसमें अभिलिखित विशिष्ट राष्ट्रीय योजनाओं, कार्यक्रमों, लोक कल्याणकारी योजनाओं, विशिष्ट जनों, वैज्ञानिक खोजों, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों की जानकारी, नीतियों के प्रचार-प्रसार की जानकारी के आधार पर बच्चों की बौद्धिक क्षमता, कार्य कुशलता, भाषाई कुशलता, शासकीय योजनाओं की जानकारी, सामान्य ज्ञान की बढ़ोतरी सहित संग्रह की प्रवृत्ति को बढ़ाने की प्रेरणा दी गई है। इसी कड़ी में कक्षा पांचवी में शामिल ‘सोन के फर’ लोक कथा की चर्चा कर उसमें निहित ‘श्रम की महत्ता’ की खुली चर्चा बच्चों के मध्य की गई।

इस पाठ के लेखक व स्रोत व्यक्ति राम कुमार वर्मा ने बच्चों से चर्चा करते हुए प्रेरित किया गया कि वे बचपन से संग्रह करने की अभिरुचि को विकसित करके अपने उम्रवार उपलब्धियां बढ़ा सकते हैं। बच्चों को इसकी निश्चित दिशा तय कराते हुए अपनी रुचि के अनुरुप चित्रों, डॉक टिकटों, माचिस डिब्बों क इस चित्रावालियों, विशेष सिक्कों, लोक कथाओं, लोकगीतों आदि को क्रमशः संग्रह करते चले जाएं। इससे उनकी शैक्षिक उपलब्धियां में निरंतर वृद्धि होगी। आज हमें जो सुविधा प्राप्त हो रही हैं, वह हमारे बुजुर्गों की खोजी और संग्रह करने की प्रवृत्तियों के कारण ही संभव हो पाया है।

अतः इसे निरंतरता के साथ जारी रखना आवश्यक है। इस दौरान संवाद में अच्छा और श्रेष्ठ बातों को जोड़ने वाले बच्चों को प्रधान पाठक की ओर से पुरस्कृत भी किया गया। इस मौके पर शाला के शिक्षक चंद्रप्रकाश रात्रे, रचना नानोडे, राजु गुप्ता भी उपस्थित रहे।






