अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने तक खाता विभाजन, अंतरण और व्यपवर्तन पर लगी रोक समाप्त

पाटन। ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डानकुनी-सूरत) परियोजना को लेकर दुर्ग जिले के 25 गांवों की जमीनों पर लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त कर दिया गया है। कलेक्टर कार्यालय, दुर्ग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, परियोजना के प्रस्तावित अलाइनमेंट के दायरे में आने वाली भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन तथा खरीदी-बिक्री पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है।

जारी आदेश के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक (विद्युत), रायपुर के पत्र दिनांक 3 जून 2026 के आधार पर दुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाले 25 गांवों की भूमि पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके लिए कार्यालयीन आदेश क्रमांक 3515/भू-अर्जन/2026 दिनांक 3 जून 2026 तथा संशोधित आदेश क्रमांक 3567/भू-अर्जन/2026 दिनांक 5 जून 2026 जारी किए गए थे।

इसके बाद परियोजना प्रबंधन के 16 सितंबर और 22 सितंबर 2026 के पत्रों के माध्यम से परियोजना के क्रियान्वयन में फिलहाल अग्रिम कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई। इसके आधार पर प्रभावित गांवों में जमीन संबंधी प्रतिबंधों को अलाइनमेंट अंतिम होने तक हटाने का अनुरोध किया गया था। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को समाप्त करने का निर्णय लिया।
इन गांवों को मिली राहत
प्रतिबंध हटाए जाने से दुर्ग अनुविभाग के बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई और डुमरडीह; पाटन अनुविभाग के परेवाडीह, पहंडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह और बटंग; तथा भिलाई-3 अनुविभाग के सोमनी, सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), गनियारी, देवबलौदा और उरला गांवों की भूमि प्रभावित होगी।
जिला प्रशासन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी प्रतिबंधात्मक आदेश दिनांक 3 जून और 5 जून 2026 के माध्यम से प्रभावित भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन और खरीदी-बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त किए जाते हैं। आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।
इस निर्णय से संबंधित 25 गांवों के उन भूमि स्वामियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो प्रतिबंध के कारण अपनी जमीन से जुड़े राजस्व संबंधी कार्य नहीं करा पा रहे थे।






