पंडरिया । ग्राम खैरझिटी पुराना के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रांगण में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब् जन्म जयंती के उपलक्ष में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तथा सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षकों, विद्यार्थियों, शाला विकास समिति के सदस्यों, ग्राम वासियों तथा कमलेश जायसवाल सह कार्यवाहक राष्ट्रीय संघ खंड पंडरिया के सहयोग से पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के तैल्यचित्र पर दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना, माल्यार्पण के साथ संगोष्ठी का शुभारंभ प्रारंभ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिवकुमार बंजारे देवी अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी जन्म जयंती समारोह में खंड संयोजक पंडरिया के द्वारा महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर की राजश्री से राजर्षि तक की सफर का बखान करते हुए कहा कि- गंगाजल जैसे निर्मल चरित्र, आदर्श कन्या, आदर्श पत्नी, आदर्श पुत्र वधु ,आदर्श माता, आदर्श प्रशासक, आदर्श न्याय की देवी, आदर्श प्रजा हितकारिणी, सादगी पूर्ण धर्म जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौड़ी ग्राम में सामान्य कृषक गड़रिया परिवार में अंधेरे में प्रकाश की किरण के रूप में पैदा हुई जिसे बार-बार अंधेरा ग्रसने की चेष्ठा करता रहा।
सामान्य परिवार में जन्म लेकर होलकर राजवंश की तथा विश्व की श्रेष्ठतम शासक के रूप में ब्रिटिश प्रशासक और अंग्रेज़ अधिकारी सर जान मालकम ने इतिहास में उल्लेख किया है। देवी अहिल्याबाई द्वारा अपने 28 वर्ष के शासनकाल में देश भर में 15000 से अधिक मंदिरों का निर्माण 12 ज्योतिर्लिंगों का पुनर्निर्माण, काशीविश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं के खर्च से किया, 8000 से अधिक धार्मिक स्थल, अनाथालयों, धर्मशालाओं, देश के प्रमुख धर्म स्थलों तथा नदियों के किनारे घाटों, कुएं, तालाबों बावड़ियों और गौशालाओं के साथ ही वृक्षारोपण सड़क निर्माण, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु महेश्वरी साड़ी उद्योग की स्थापना जैसे अनेक कार्य किया जिसका फ़ेहरिस्त काफी लंबी है।
अहिल्याबाई होल्कर ने देश भर के विद्वानों को महेश्वर में नर्मदा के तट पर संरक्षण दिया। देवी अहिल्याबाई ने अपना संपूर्ण राज्य शिव को समर्पित कर उसकी संरक्षिता बनकर राज किया। उनका जीवन बहुत ही संकट पूर्ण और संघर्ष भरा रहा। वे केवल होल्कर राजवंश की ही नहीं बल्कि पूरे भारत में एक न्याय प्रिय दानशील और कुशल प्रशासिका के रूप में जानी जाती है। उन्होंने अपने 28 वर्ष के शासनकाल में अपने आत्मजनों के 23 मृत्यु देखी। 13 अगस्त 1795 में वह शिवलोक वासी हुई। सादगी पूर्ण जीवन व्यतीत करने वाली एक शिव भक्त होते हुए वीरांगना के रूप में अहिल्याबाई होल्कर का नाम संपूर्ण देश -विदेश में श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित-जन कृष्णकुमार जायसवाल अध्यक्ष शाला विकास समिति, सदस्यगण- राधेलाल पटेल, यशवंत जायसवाल, अमरू जायसवाल, गंगाराम जायसवाल, रामजी पटेल, जीतराम धुर्वे, अशोक जायसवाल, दुखीराम जायसवाल, सहित जे. आर. पुषाम प्राचार्य, व्याख्यातागण- के. के. राज, बी.एस. धुर्वे, एस. के. भंडारी, महेश गिरी, एम.के. कौशिक, जे. आर. गोयल, पी. के. चंद्रवंशी, पी. कुलमित्र, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य घनश्याम चंद्रसेन, आचार्य राकेश जयसवाल, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षक अविनाश पात्रे सहित ग्राम वासीगण तथा 300 से अधिक छात्र -छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।






