दुर्ग। ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों में बिजली कनेक्शन काटे जाने से नाराज सरपंच संघ ने अब प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। प्रदेश सरपंच संघ प्रभारी छत्तीसगढ़ एवं सरपंच संघ अध्यक्ष दुर्ग युगल किशोर साहू के नेतृत्व में जनपद संघ अध्यक्ष ढालेश साहू, सचिव अनिल बंजारे सहित कई सरपंचों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों को आवेदन सौंपा और पंचायत भवनों की बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

सरपंच संघ के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 11,337 सरकारी विभागों के कार्यालयों पर 23,509.59 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। इनमें सर्वाधिक 8,219 कनेक्शन ग्राम पंचायतों के हैं, जिन पर करीब 14,446.60 लाख रुपये की राशि बकाया बताई गई है।

दुर्ग जिले के रिसामा, चिरपोटी, मतवारी, अंडा, अछोटी, जजंगिरी सहित आसपास के कई गांवों के पंचायत भवनों की बिजली काटे जाने की बात सामने आई है। बिजली कटौती के कारण पंचायतों के रोजमर्रा के कामकाज और ऑनलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

‘बिना बिजली के कैसे होगा ऑनलाइन पंचायत का काम’
प्रदेश सरपंच संघ प्रभारी युगल किशोर साहू ने कहा कि वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर पिछले 10 से 15 वर्षों से चले आ रहे बिजली बिल के बकाये का भुगतान करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायतों को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराए, तभी पंचायतों द्वारा विद्युत विभाग का बकाया बिल चुकाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज पंचायत का लगभग हर काम कंप्यूटर और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होता है। ऐसे में पंचायत भवन की बिजली काट दिए जाने से पूरा कामकाज ठप हो रहा है। एक तरफ देश को डिजिटल और विकसित बनाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत भवनों में बिजली नहीं होने से जरूरी काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
‘कल गली की लाइट और मोटर पंप कटे तो जिम्मेदारी किसकी?’
साहू ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि पंचायत भवनों के बाद गली की बिजली, स्ट्रीट लाइट और मोटर पंपों के कनेक्शन भी काटे जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। बिजली के अभाव में ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने में भी परेशानी होगी।
उन्होंने कहा कि पंचायतें जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे।
सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पंचायतों के हित में उचित दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए और बिजली कटौती की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो छत्तीसगढ़ प्रदेश सरपंच संघ जल्द ही ठोस कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।






