अर्जुनी । पर्यावरण रक्षक संस्था EDO CHHATTISGARH टीम द्वारा अर्जुनी के मंडी रोड पर स्थित शिव मंदिर के पास आम, नीम, पीपल और बरगद के पौधे लगाए गए। शिव मंदिर तालाब परिसर में पौधारोपण के दौरान टीम को स्थानीय महिलाओं ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा की तालाब किनारे सिर्फ एक तरफ जाली का घेराव है, जबकि दूसरी ओर कोई घेराव नहीं है। इससे लावारिश मवेशी तालाब किनारे पहुंचकर पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे पौधे सफल नहीं हो पाते।औऱ न ही पौधे के देखरेख के लिये पंचायत द्वारा कोई उचित व्यवस्था किया गया है। जिससे कारण उक्त स्थान पर पौधे लगाना चुनौतीपूर्ण है।
स्थानीय महिलाओं ने कहा कि इस मुद्दे पर पंचायत प्रशासन को ध्यान देना चाहिए और पौधों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।साथ ही लोगो को भी जागरूक होना पढ़ेगा ताकि पेड़ो का संरक्षण हो सके।
हमारी भी यही मांग है कि जितना हो सके हमें पेड़ो को संरक्षण प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए न केवल प्रशासन द्वारा बल्कि अपने स्तर पर जितना हो सके उतना योगदान दे सकते है।
अपने आसपास के एक एक पेड़ो की जिम्मेदारी लेकर हम इसे बड़ा कर सकते है ।
भोलेनाथ को अर्पण किया बेल का पौधा — सरयू साहित्य परिषद के अभियान से जुड़ा एडीओ छत्तीसगढ़
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्यरत EDO CHHATTISGARH* ने सरयू साहित्य परिषद के चलाए जा रहे अभियान “बेल पौधे का रोपण, भोलेनाथ को अर्पण”* से जुड़ते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की।
पर्यावरण रक्षक संस्था EDO की टीम ने शिव मंदिर परिसर के पास बेल का पौधा रोपित कर भगवान शिव को समर्पित किया।
इस अवसर पर एडीओ छत्तीसगढ़ की टीम द्वारा श्रद्धालुओं और आमजन से एक विशेष अपील किया कि जिस श्रद्धा भाव से हम भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करते है ठीक उसी श्रद्धा भाव से न केवल बरगद , बेल या पीपल में बल्कि सभी पेड़ो में जो आपके आसपास है उनमें भी नियमित रूप से जल अर्पण करे इससे आप एक तरह से न केवल भगवान को प्रसन्न करते है बल्कि उनके द्वारा बनाए पर्यावरण को बचाने में भी अपना एक सशक्त योगदान देंगे। एडीओ छत्तीसगढ़ संस्था निरंतर ऐसे अभियानों से जुड़कर पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रही है।हमारा मानना है कि पेड़ लगाना एक पुण्य है, लेकिन उनकी देखभाल करना उससे भी बड़ा धर्म है।






