संजय साहू अंडा।शैलदेवी महाविद्यालय अण्डा दुर्ग छ.ग. के शिक्षा संकाय द्वारा दिनांक व्यक्तित्व विकास पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमे मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप मे स्वामी प्रपद्यानंदा रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम रायपुर एवम डॉ विनीत साहू सहायक प्राध्यापक शासकीय महाविद्यालय गरियाबंद छ. ग. रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजन कुमार दुबे,अध्यक्ष शैलदेवी महाविद्यालय द्वारा की गई। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम मे डाॅ रजनी राय, प्राचार्य के.एन. मिश्रा एवं शिक्षा संकाय के समस्त प्राध्यापक गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि स्वागत से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी प्रपद्यानंदा जी के व्याख्यान से हुआ , जिसमें उन्होंने बताया की गुरु की बातों का पालन करना मनुष्य प्राणी के लिए अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने स्वामी जी के व्यक्तित्व को सारगर्भित बताये तथा उन्होंने कहा कि 24 घंटे में हम जिस प्रकार जीवन जीते हैं या व्यवहार कर रहे हैं वही हमारा व्यक्तित्व कहलाता है। चेतना का विकास मनुष्य के बच्चे के विकास जैसा है।





व्यक्तित्व का विकास शिविर के माध्यम से किया जा सकता है । स्वामी जी ने आगे बताया कि व्यक्ति अपनी योजनाओं को अगर क्रियान्वित कर लेता है तो वह निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकता। स्वामी जी ने बछेंद्री पाल , अरुणिमा सिन्हा के माध्यम से बताया कि किस प्रकार कठिनाइयां को पार करके सफलता प्राप्त की जा सकती है । इसी कड़ी में डॉ विनीत साहू ने भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये जिसमें उन्होंने अपने उद्बोधन में बताये कि व्यक्ति का व्यक्तित्व किस प्रकार निखर कर सामने आता है। सबसे पहले मनुष्य को दृढ़ शक्ति से, शुद्ध मन से किसी काम को करना चाहे तो वह कर सकता है। जो बुद्धि शुद्ध होती है वही बुद्धि तेज होती है इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमारे गर्व करने से हम तो खुश हो जाते हैं लेकिन उसे किसी दूसरे का अहित न हो इसका भी पालन करना चाहिए । व्यक्तित्व विकास जीवन की एक सतत प्रक्रिया है मनुष्य को सीखना नहीं छोड़ना चाहिए अगर छोटे बच्चों से भी कुछ सीखने को मिल रहा है तो उसे स्वीकार करना चाहिए ऐसा नहीं कि वह छोटा है तो हमें उसे सीखने में घमंड महसूस करें ऐसी छोटी-छोटी बातों को त्यागना चाहिए। इस प्रकार यह व्याख्यान शिक्षकों और छात्रों के लिए फल फलदायी रहा। अंतत: यह कार्यक्रम जिस उद्देश्य के लिए आयोजन किया गया था वह सफल रहा।






