खेती किसानी : खेत में “काई”,”खरपतवार” और “कीट” का ऐसे करें प्रबंधन….ऐसे करें अमानक खाद की जांच….धान की खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की किसानों को सलाह

राजू वर्मा

सीजी मितान न्यूज़

पाटन।वर्तमान में धान की खेती में कई समस्याएं हैं, जैसे कि कीटों और रोगों का प्रकोप, खरपतवारों का नियंत्रण, पानी की कमी, और काई। इन समस्याओं के समाधान के लिए, किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन, उन्नत बीज और उर्वरक उपयोग, सिंचाई प्रबंधन ।
धान की खेती में आने वाली समस्याओं के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पाहन्दा अ के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए सुझाव जारी किए हैं…

धान में  काई की समस्या का निदान –

समस्या :- धान के खेत में  काई हो जाने के कारण पौधों का विकास रुकना तथा खादो / उर्वरकों का समुचित लाभ न मिलाना ।
उपचार :- कॉपर सल्फेट /नीला थोथा का 400 -500 ग्राम  प्रति एकड़ की दर से नीला थोथा को  कूटकर बारीक करके सूती कपड़ों में पोटली बनाकर खेत में जगह-जगह डालने से काई फट जाते हैं ।

धान के प्रमुख खरपतवार –
धान फसल के खरपतवारों को दो प्रमुख  भागों में बांट सकते हैं –
(अ) सकरी  पत्ती वाले खरपतवार –  सांवा , सोमना    बदाउर , सिलयारी  ,दूब घास  ,बटन मोथा , जाल मोथा नागर मोथा ,  घोड़चब्बा  आदि ।
(ब) चौड़ी  पत्ती वाले खरपतवार – रेशम कांटा ,कौवा केना , केना छोटी दूधी  ,बड़ी दूधी , बन मिर्ची आदि ।
1. बोता  धान हेतु जमाव पूर्व प्रमुख खरपतवार्नशी –
धान खेत में पर्याप्त नमी रहते हुए निम्न खरपतवार नियो में से किसी एक को 0 -3 दिनों के भीतर छिड़काव करें –
1. पंडोमेथालींन 30 प्रतिशत एक (स्टांप) का 700 – 1000 मिली प्रति एकड़
2 .     पयारेजोसफ्यूरॉन  ‌ इथाइल 10 प्रतिशत डब्ल्यू  पी (साथी)  का 80 – 100% ग्राम प्रति एकड़
3. पीनाक्लुसम (1 एक प्रतिशत) + पेंडिमथिलीन 24 प्रतिशत -25%  एस.  ई.  (यूना) का 1 लीटर प्रति एकड़
रोपा धन हेतु प्रमुख खरपतवार्नशी –
प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत  ई. सी.( रिफिट)  300 – 400  मिली प्रति एकड़  रोपाई के तीन से  छह दिनों बाद छिड़काव करें ।
2.पायरेजो सल्फ्यूरान    इथाइल 10 प्रतिशत  डब्ल्यू  पी (साथी)    का 80 – 100  ग्राम / प्रति एकड़ रोपाई के 0- 3दिनों के अंदर छिड़काव करें ।
3.प्रेटिलाक्लोर  6 प्रतिशत + बेन सल्फ्यूरॉन मिथाइल 0.6 प्रतिशत दानेदार (लोन डॉग्स) का चार किलोग्राम प्रति एकड़ 0-3  दिन के भीतर छिड़काव करें।
अंकुरण /रोपाई पश्चात धन हेतु प्रमुख खरपतवार नाशी
खरपतवार उगाने के 20 से 25 दिनों के अंदर निम्न में से किसी एक खरपतवारनाशी का छिड़काव करें।
सकरी  पत्ती वाले व चौड़ी  पत्ती वाले दोनों प्रकार के खरपतवार हेतु –
1. बिसपायरिक सोडियम 10%  एस. सी. (नॉमिनी गोल्ड)  का 100मिली/एकड़ ।
2. फिनॉक्साप्राप पी. ईथारल 9.3प्रतिशत  डब्ल्यू ई. सी.(व्हिप सुपर ) का 250  मिली  के साथ  क्लोरीम्यूरान 10 प्रतिशत + मेट्ससल्फ्यूरॉन 10 प्रतिशत  आलमिक्स के आठ ग्राम/एकड़ को मिलाकर

सकरी  पत्ती वाले खरपतवार के लिए –
1.फिनॉक्साप्राप पी. ईथारल 9.3प्रतिशत  डब्ल्यू ई. सी (व्हिप सुपर) का 250 मिली /एकड़
2. पिनाक्सूलम 21.7 प्रतिशत एस. सी.  (ग्रेनाइट) का 42 मिली प्रति एकड़
सांवा व सोमना के लिए खरपतवारनाशी –
1.फिनॉक्साप्राप पी. ईथारल 9.3प्रतिशत  डब्ल्यू ई. सी.(व्हिप सुपर ) का 250  मिली/एकड़
2. साईहेलोफाप ब्युटाइल 10% ई. सी. क्लींचर का 300 -400 मिली प्रति एकड़
चौड़ी  पत्ती वाले खरपतवारों के लिए
क्लोरीम्यूरान 10 प्रतिशत + मेट्ससल्फ्यूरॉन 10 प्रतिशत आलमिक्स के आठ ग्राम/एकड़ को मिलाकर 
2. ईथाक्सीसल्फ्यूरान 15% डीसी ( सनराइज) का 40 ग्राम  प्रति एकड़

धान के  पत्ती के ऊपरी नोक का सुखना तथा रोपाई उपरांत पौधों के विकास में कमी होना –
खेत में  हुमिक अम्ल की कमी के कारण  सामान्यतः लक्षण दिखता है ।अतः पर्याप्त मात्रा में जुटा के समय गोबर खाद का उपयोग करें। त्वरित उपचार हेतु  हुमिक अम्ल का छिड़काव करें।

धान की खेती में डी .ए .पी .का वैकल्पिक व्यवस्था क्या है –
1. एस. एस. पी. राखड़ तीन बोरी / एकड़
2.12:32:16 बोरी /एकड़

अमानक खाद की पहचान की विधियां है :-

यूरिया  :- एक गिलास पानी में एक चम्मच  यूरिया डालें अगर पानी साफ है और यूरिया जल्दी घुल जाए तो यूरिया असली है ।नकली उड़िया में पानी धुंधला हो सकता है या दाने नीचे नहीं बैठ सकते हैं ।

डी. ए .पी. : – एक कटोरी में थोड़ा पानी डालकर डीएपी के दाने डाले अगर पानी में थोड़ी बदबू और हल्का रंग आता है तो डीएपी असली है ।नकली डीपी के दाने जल्दी टूट सकते हैं और पानी में दूधिया रंग या जाग सकता है।
एस. एस. पी./राखड़ : – गीले हाथ में थोड़ा सा राखड़ खाद लेने पर थोड़ी  गंध महसूस होती है तो रा खड़ खाद असली है ।नकली राखड़ खाद में गंध नहीं आता है या रंग बहुत सफेद हो सकता है।

पोटाश : – थोड़ा सा पोटाश पानी में डालें अगर पानी हल्का गुलाबी हो और घुल जाए तो असली है। नकली में रंग नहीं निकलेगा या दाने रह जाएंगे।

धान के प्रमुख रोग व प्रबंधन : –
1. झुलसा रोग ब्लास्ट  – टैबूकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ई. सी . (फालीकुर) का 150 – 200  मिली एकड़ या  ट्राई फ्लाक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत + टेबूकोनाजोल 50 प्रतिशत डब्ल्यू.  पी. (नेटीयो)  का 150ग्राम /एकड़ का छिड़काव करें ।
2. जीवाणु जनित झुलसा/ बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट –
अ) इस रोग का रासायनिक दवाइयां द्वारा उपचार नहीं है।
ब )  संतुलित उर्वरक का उपयोग करें ।रोग उग्रता की स्थिति में यूरिया खाद का छिड़काव ना करें ।
स) यदि संभव हो तो खेत से पानी खाली कर 10 -12 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ का छिड़काव करें ।

धान के कीट व प्रबंधन
तना छेदक  –
अ) दानेदार -करटॉप हाइड्रोक्लोराइड 4%  डब्ल्यू . जी. 7 – 8 किलोग्राम प्रति एकड़
ब)  फिप्रोलिन 5%  एस.  सी .(रिजेंट) का 350  – 400 मिली प्रति एकड़

धान फसल में लाल कीड़ा की समस्या।
नुकसान : -धान फसल में जड़ों को खा जाता है जिससे पौधे का विकास रुक जाता है ।

उपचार -: इमिडाक्लोप्रिड 17.8 % का 60 – 80 मिली/एकड़ या दानेदार दवाई क टॉप हाइड्रोक्लोराइड 4% दानेदार का 7 -8 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें जहां तक संभव हो पानी की मात्रा 1-2 इंच की रखें।