बलराम यादव
पाटन। राजनांदगांव जिले के घुमका तहसील क्षेत्र में शासकीय पट्टे की जमीन को बिना सक्षम अनुमति बेचने के मामलों में बिक्री निरस्त कर जमीन को पुनः शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब पाटन क्षेत्र में भी ऐसे मामलों को लेकर हलचल तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि नगर पंचायत पाटन में शामिल पाटन, अखरा, अटारी और इंदिरा नगर क्षेत्र में पूर्व में शासन द्वारा जरूरतमंद परिवारों को घास भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश शासन के राजस्व मंत्री जालम सिंह पटेल के कार्यकाल के दौरान इन क्षेत्रों में करीब 500 जरूरतमंद लोगों को शासकीय पट्टे प्रदान किए गए थे।

सूत्रों के मुताबिक इनमें से करीब 100 पट्टाधारकों द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के पट्टे की जमीन की बिक्री किए जाने की बात सामने आ रही है। इतना ही नहीं, कुछ जमीनों के एक से अधिक बार बिक्री किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 1995-96 के आसपास का है। उस समय जरूरतमंद लोगों को शासन की ओर से दी गई जमीन का उद्देश्य उन्हें आवास एवं जीवन-यापन के लिए भूमि उपलब्ध कराना था। यदि पट्टे की शर्तों के विपरीत बिना अनुमति जमीन का विक्रय हुआ है तो ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों और बिक्री दस्तावेजों की जांच जरूरी हो जाती है।
इंदिरा नगर में अधिक मामले होने की चर्चा
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि पाटन नगर के इंदिरा नगर क्षेत्र में ऐसे मामलों की संख्या अधिक हो सकती है। राजनांदगांव जिले में इसी तरह के मामलों पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई शुरू होने के बाद अब पाटन क्षेत्र में भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालने की मांग उठ रही है।
लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग को पाटन, अखरा, अटारी और इंदिरा नगर क्षेत्र में वितरित किए गए शासकीय पट्टों की वर्तमान स्थिति की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि पट्टे की जमीन का कहीं नियम विरुद्ध विक्रय या हस्तांतरण तो नहीं किया गया है। यदि अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।





