लकड़ी काटने की खुली छूट, राजनैतिक दबाव के कारण अधिकारी नहीं ले रहे रुचि

राजकुमार सिंह ठाकुर

पंडरिया । वन उपमंडल पंडरिया अंतर्गत बदौरा के आस-पास के जंगलों में प्रतिदिन सैकङो पेड़ काटे जा रहे हैं।इसके लिए वन विभाग ने लकड़ी चोरों को खुली छूट दे रखी है।रोज सुबह सायकल में लकड़ी रखकर लकड़ी चोर जंगल से लकड़ी ल रहे हैं।इनके द्वारा पेड़ो को गडलिंग कर पेड़ों को सुखाया जाता है,फिर काटकर जलाऊ के रूप में लाया जाता है।इन लकड़ियों को नगर के होटलों में बेचा जाता है।वन विभाग के कर्मचारी इनको लकड़ी लाते हुए देखते हैं,किन्तु कार्रवाई नहीं करने मजबूर हैं।प्रतिदिन सुवह 5 बजे से 50 से अधिक सायकल में लकड़ी लेकर नगर की ओर बेचने आते हैं।50 सायकल अर्थात 50 पेड़ों की बलि प्रतिदिन लोग अपनी थोड़े से लाभ के लिए चढ़ा रहे हैं। एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कार्यवाही करने के बाद नेताओं द्वारा लकड़ी व सायकल छोड़ने दबाव बनाया जाता है।जिससे कार्यवाही का कोई मतलब नहीं होता है।जिसके चलते हमें हतोत्साहित होना पड़ता है।

कार्रवाई के नाम पर खाना पूर्ति-वन विभाग द्वारा कार्यवाही के नाम पर केवल खाना पूर्ति की जाती है।विगत दिनों वन विभाग द्वारा 26 सायकल में लकड़ी परिवहन करते हुए लोगों को पकड़े थे।जिसके पश्चात सायकल को राजसात की कार्यवाही की जानी थी।किन्तु विभाग द्वारा मात्र 300 रुपये लेकर छोड़ दिया गया।300 रुपये भी केवल दिखाने के लिए जुर्माना किया गया है।छोड़ने का असली कारण राजनेताओ के दबाव को माना जा रहा है।नगर में यह चर्चा है कि सायकल को छोड़ने के लिए मुख्यमंत्री के पंडरिया दौरा के समय अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही की भी बात राजनेताओं द्वारा कही गयी है।जिसके दबाव के चलते अधिकारियों ने सायकल को मामूली कार्रवाई कर छोड़ दिया।

राजनेता देते हैं संरक्षण- क्षेत्र के जंगलों में कटाई के लिए विभाग के कर्मचारी अधिकारी से ज्यादा जिम्मेदार क्षेत्र के राजनेता हैं।जो लकड़ी चोरों को संरक्षण प्रदान करते हैं।लकड़ी परिवहन करते पकड़े जाने पर सायकल छोड़ने अधिकारियों को फोन कर मजबूर किया जाता है।जिससे अधिकारी-कर्मचारी हतोत्साहित होते हैं तथा चोरों के हौसले बुलंद होते जाते हैं।वोट के कारण ये राजनेता अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं तथा वनों को उजाड़ने व लोगों के जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।