पंडरिया में इन दिनों कुम्भी में लग रहे फल, कुम्भी का औषधीय फल शराब छुड़ाने में लाभकारी, अन्य कई रोगों के लिए फायदेमंद

राजकुमार सिंह ठाकुर

पंडरिया । नगर के आस-पास व वनांचल में इन दिनों कुम्भी के पेड़ पर फल लग गए हैं।कुम्भी का फूल अत्यंत आकर्षक होता है,जिसमे रेसे उठे हुए होते हैं।इसका फूल खूबसूरत होने के साथ अत्यंत गुणकारी होता है।कुम्भी के पेड़ की ऊंचाई करीब 15 से 20 फिट तक होती है।कुम्भी एक औषधीय पेड़ है।कुम्भी की जड़, छाल,फूल व फल का उपयोग सर्पदंश, परिवार नियोजन, बुखार, कुष्ठ रोग और घाव भरने की दवा बनाने में किया जाता है। वैद्यराज डॉ गिरजा कुमार शुक्ला ने बताया कि इसकी अनेक प्रजातियां पाई जाती है।पीला पलाश या गबदी की छाल और गोंद का प्रयोग चर्म, मिर्गी रोग और उदर विकार औषधि में किया जाता है। खरपट या केंकड की छाल का प्रयोग किडनी, कैंसर और श्वांस की औषधियों में होता है।उन्होंने बताया कि इसकी 30 से अधिक प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर पहुँच गई है। इन प्रजातियों का औषधीय व वन्य-प्राणियों के लिये चारे का महत्व होने के साथ वनवासियों की परम्पराओं, रीति-रिवाजों और विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति से भी गहरा संबंध है। जैव-विविधता की दृष्टि से इनका स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान है।संवेदनशील प्रजातियों में कुम्भी, पीला पलाश, खरपट, पाडर, कुल्लू, रोहिना और शीशम शामिल हैं।पीला पलाश या गबदी की छाल और गोंद का प्रयोग चर्म, मिर्गी रोग और उदर विकार औषधि में किया जाता है।

शराब छुड़ाने में महत्वपूर्ण-डॉ शुक्ला बताते हैं कि कुम्भी का उपयोग शराब पीने की लत को छुड़ाने में महत्वपूर्ण है।इसके फल को कुछ आवश्यक सामग्री मिलाकर गोली बनाते हैं,जिसके बाद इसका सेवन किया जाता है।मान्यता है कि जहाँ शराब बनता है वहां इसके फल को रख देने से ही शराब नहीं बनता है।बनने वाला शराब पानी हो जाता है।