Yogita Mandavi: कोण्डागांव की योगिता मंडावी ने जूडो में शानदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार हासिल किया. बालिका गृह में पली-बढ़ी योगिता की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है ।

Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की प्रतिभाशाली लड़की योगिता मंडावी ने जूडो खेल में प्रदेश ही नहीं पूरे देश का नाम गौरवान्वित किया है. छत्तीसगढ़ में बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोंडागांव में पली बढ़ी योगिता को उनकी उल्लेखनीय खेल उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित पीएम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय सम्मान देकर सम्मानित किया. बता दें कि योगिता ने अपने हौसले और मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है ।
Yogita Mandavi Success Story: जिस उम्र में बच्चे माता-पिता की उंगली पकड़कर सपनों की दुनिया में कदम रखते हैं, उसी उम्र में योगिता मंडावी की दुनिया उजड़ चुकी थी. महज चार साल की नन्ही उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ गया ।वह अनाथ हो गई, लेकिन किस्मत उनसे हिम्मत नहीं छीन पाई.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले के छोटे से गांव हिर्री से निकली अनाथ बच्ची योगिता मंडावी ने हालातों से हार मानने के बजाय जूडो को अपना सहारा बनाया. आज 26 दिसंबर 2025 को महज 14 साल की उम्र में वह राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन चुकी हैं और पूरे देश में अपनी पहचान बना ली है ।नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में योगिता को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों Prime Minister Bal Puraskar 2025 से सम्मानित किया गया
बचपन से संघर्षों से भरा रहा जीवन
गरीबी, अकेलापन और संघर्ष को पीछे छोड़ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 हासिल कर योगिता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी झुक जाते हैं । योगिता मंडावी का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा है. उनका जन्म 01 जनवरी 2011 को छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम हिर्री में हुआ था. वर्ष 2015 में उनके पिता मायाराम मंडावी और माता सुकमती मंडावी का निधन हो गया. उस समय योगिता की उम्र मात्र चार वर्ष थी.
माता-पिता की मौत के बाद चाचा-चाची ने पाला
माता-पिता की असमय मौत के बाद योगिता अपने चाचा-चाची के संरक्षण में रहने लगीं. देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए 25 जनवरी 2021 को जिला प्रशासन द्वारा उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के बालगृह बालिका, कोंडागांव में प्रवेश दिलाया गया. वर्तमान में योगिता स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, तहसीलपारा कोंडागांव में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं ।10 साल की उम्र में चुना जूडो का रास्ता
योगिता की चाचा व चाची ने बताया कि बालगृह बालिका, कोंडागांव में दाखिले के बाद योगिता ने अपने जीवन को नई दिशा दी. मात्र 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने जूडो खेल को अपनाया. कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर बहुत कम समय में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने राज्य स्तर पर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया.
वर्ष 2024 में दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय शालेय जूडो प्रतियोगिता में योगिता ने गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके अलावा खेलो इंडिया क्षेत्रीय प्रतियोगिता 2024 (नासिक) में सिल्वर मेडल और खेलो इंडिया राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता 2024 (केरल) में भी सिल्वर मेडल जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया ।
राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
वर्ष 2025 में योगिता ने राज्य स्तरीय ओपन जूडो और राज्य स्तरीय शालेय जूडो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया । वहीं राष्ट्रीय ओपन जूडो प्रतियोगिता 2025 (हैदराबाद) में ब्रांज मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.
भोपाल में ले रही हैं विशेष प्रशिक्षण
महज 14 वर्ष की आयु में योगिता मंडावी राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी बन चुकी हैं. वर्तमान में वह स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचल से निकलकर योगिता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले, तो हौसलों को पंखों की जरूरत नहीं होती. इंसान जमीन से ही आसमान छू सकता है. कोंडागांव जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बालिका योगिता मंडावी को जिले और प्रदेश का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं.
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