


दुर्ग । कहते हैं ईश्वर ने यह पूरी प्रकृति, जीव जंतुओं और हम इंसानों को गड़ा है , लेकीन प्रकृति ने इंसानों के बीच कुछ ऐसे भी लोग बनाए हैं , जो ईष्ट ईश्वर को भी गड़ने की क्षमता रखते है और वह हैं मूर्तिकार। जी हां दुर्ग के शिवनाथ नदी के तट पर बसे थानौद गांव के हुनर मंद हाथ कोरोना काल के बाद पुनः मूर्तियों को अन्तिम रूप देने में व्यस्त हैं।
शिवनाथ नदी के तट पर बसा थानौद गांव वैसे तो अन्य गांव की तरफ कृषि पर निर्भर है लेकीन यह गांव एक विशेषता की वजह से पूरे छत्तीसगढ़ अंचल के साथ साथ आसपास के राज्यों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है और वह यहां की बनी मूर्तियां। गांव की ही विशेष मिट्टी से निर्मित और अपनी अद्भुत शिल्पकारी से गड़ी गई मुर्तियां , देखने सहसा जीवन्त नजर आती हैं , मानो अब तक वे बोल उठेंगे , यह कमाल है , इस गांव के हुनरमंद हाथों का जो अपनी पुश्तैनी कला को निरंतर आकृति प्रदान कर रहे हैं।






