पंडरिया।ब्लाक के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, दुल्लापुर बाजार में रक्षाबंधन पर्व को अनूठे और प्रेरणादायी तरीके से मनाया गया। विद्यालय की बालिकाओं ने विद्यालय में उपस्थित बुजुर्गों को राखी बांधकर उनका आशीर्वाद लिया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधों की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में स्नेह, संस्कार और सामाजिक सरोकार का सुंदर संगम देखने को मिला।

बालिकाओं ने स्वयं अपने हाथों से तैयार की गई राखियां बुजुर्गों की कलाई पर बांधीं। राखी बांधने के बाद बालिकाओं ने बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया। बुजुर्गों ने भी बालिकाओं को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह भावुक और आत्मीय क्षण उपस्थित सभी लोगों के लिए यादगार बन गया।
रक्षाबंधन के अवसर पर बालिकाओं ने केवल मानव रिश्तों तक ही पर्व को सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यालय परिसर में पौधों को रक्षासूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प भी लिया। बालिकाओं ने कहा कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के आधार हैं। वे हमें स्वच्छ वायु, फल, छाया, औषधियां और पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए जिस प्रकार हम अपने प्रियजनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी प्रकार प्रकृति और पेड़-पौधों की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है।वृद्धाश्रम में भी बांधी राखी, वितरित किए फल-मिठाई

इसी क्रम में विद्यालय की बालिकाएं कवर्धा स्थित वृद्धाश्रम पहुंचीं, जहां उन्होंने वहां निवासरत बुजुर्गों को राखी बांधकर उनका आशीर्वाद लिया। बालिकाओं द्वारा अपने हाथों से बनाई गई राखियां बुजुर्गों की कलाई पर बांधी गईं। लंबे समय बाद बच्चों के स्नेह और अपनत्व से बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी और कई भावुक क्षण भी देखने को मिले।

इस अवसर पर विद्यालय की अधीक्षिका एवं बालिकाओं द्वारा वृद्धजनों को फल, मिठाई एवं मच्छरदानी का वितरण भी किया गया। बालिकाओं ने बुजुर्गों को अपने हाथों से मिठाई एवं फल भेंट किए और उनके साथ आत्मीयता से समय बिताया। इस पहल से वृद्धाश्रम का वातावरण भी भावनात्मक और खुशनुमा हो गया।
विद्यालय की अधीक्षिका कामिनी जोशी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सुरक्षा, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। बालिकाओं द्वारा बुजुर्गों को राखी बांधना और पौधों की रक्षा का संकल्प लेना समाज तथा पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं में शिक्षा के साथ संस्कार, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य है। वृद्धजनों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनापन देना और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना इस पर्व को और अधिक सार्थक बनाता है।
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने प्रेम, सेवा, सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बुजुर्गों की कलाई पर बंधी राखी और पौधों पर बांधा गया रक्षासूत्र इस बात का प्रतीक बना कि सुरक्षा और संरक्षण की भावना केवल रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है।







