राजकुमार सिंह ठाकुर

पंडरिया । ब्लाक के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत इस वर्ष चार फल की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।वनांचल के सभी पेड़ों में भारी मात्रा में चार के फल लगे हुए हैं।पंडरिया पश्चिम रेंज के जंगलों में चार के अधिक पेड़ हैं।जो आदिवासियों के जीवन यापन का हिस्सा है।बैगा आदिवासी चार का बीज एकत्रित कर इसे समिति के माध्यम से वन विभाग को बेचते हैं।इसके बीच से चिरौजी निकलता है जो काफी किफायती होता है।चार के फल को पकने के बाद खाते हैं,इसका स्वाद खट्टा मीठा होता है।चार फल के बीज को तोड़कर चिरौंजी निकाला जाता है।चार के पेड़ की ऊंचाई 20 से 30 फिट की होती है।इसका फल मार्च महीने में लगता है,जो अप्रेल के अंत तक पकता है।चार के फल पकने वाले हैं।जिसके रखवाली में बैगा आदिवासी जुट गए हैं।
व्यंजनों में होता है उपयोग-चार के चिरौंजी का उपयोग अनेक व्यंजन बनाने में होता है।मिठाई ,खीर सहित अनेक पकवान में चिरौंजी डाला जाता है।इसका स्वाद काफी उपयोगी होता है।इसके अलावा बहुत ही स्वादिष्ट होता है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण- चिरौंजी स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।आयुर्वेदिक दृष्टि से काफी उपयोगी माना जाता है।वैद्यराज गिरिजा कुमार शुक्ला ने बताया कि चार व चिरोंजी आयुर्वेदिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।चार हृदय रोग,वात-पित्त के लिए लाभदायक है।साथ ही बुखार ,जलन,प्यास व शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।






